22 मार्च 2020 से देश में लगभग दिसम्बर 2020 तक लॉक डाउन रहा । न शिक्षण संस्थान खुले और न ही प्राइवेट कोचिंग संस्थान । ऑनलाइन चल रही पढ़ाई से शिक्षा के नाम पर हो रही खानापूर्ति बस बच्चों के अभिभावकों से शुल्क वसूलने तक ही सीमित रही । बिना किताब का मुह देखे बच्चे नई कक्षाओं में प्रवेश पाकर तो खुश नजर आ रहे हैं लेकिन आज उनको यह एहसास नही है कि उनके भविष्य के साथ कितना बड़ा खिलवाड़ हो रहा है । मझेदार बात तो यह है कि कोरोना सबसे ज्यादा प्रभावी भी शिक्षण संस्थानों में ही है बाकी तो बिहार चुनाव रेली में कहीं कोरोना दिखा ही नही, जानते हैं क्यों ? क्योंकि वहां स्वयं मोदी जी मौजूद थे । यही हाल बंगाल चुनाव में भी चल रहा है लेकिन शिक्षण संस्थान अगर खुले रहे तो आने वाली पीढ़ी कहीं समझदार न हो जाए इसलिए वर्तमान सरकार के बुद्धिजीवी वर्ग के तथाकथित सरगनाओं को दिक्कत नजर आ रही है । आपको याद होगा वर्ष 2020 मार्च का महीना जब देश में कोरोना आया था और मदरसों पर एक के बाद एक आरोप लगाए गये, मुस्लिम समाज को एक तरीके से कठघरे में ला खड़ा किया गया कि मानो कोरोना वाहक सिर्फ यही लोग रहे हो । मीडिया को बोलने की आजादी का मतलब भी उसी समय पहली बार समझ आया जब वर्तमान सरकार चुपचाप पीछे से तमाशा देखती रही । लेकिन साल बदला और बारी कुंभ की आई तो तमाम बातों को ताक पर रख दिया गया । राज्य में समूह ग जैसी भर्ती के लिए लाखों युवा अपना घरबार छोड़कर देहरादून पड़े हुए है कि वे अपनी तैयारी कर सकें लेकिन इसी बीच फिर शुरू होता है कोरोना का नया दौर जिसमें कुंभ तो चल सकता है लेकिन शिक्षण संस्थान नही ।

मीडिया खामोश है, क्योंकि अगर कुछ कहा तो सरकार नाराज हो जाएगी और सरकार नाजर हो गई तो पत्रकारिता करनी पड़ेगी । अच्छा है, ठंडे कमरों में बैठकर ही इंटरनेट की मदद से प्राप्त जानकारी से काम चलाया जाय और अधूरी जानकारी को सच बनाकर लोगों को डराया जाय । आखिर कोरोना भाजपा या अन्य राजनीतिक दलों की जन सभाओं में क्यों नही है । अगर "दी ललनटॉप" यूट्यूब चैनल की माने तो भाजपा की रैलियों में भीड़ दिखाने के लिए लोगों को पैसा देकर बिहार से बुलाया जा रहा । https://youtu.be/lMf-aM_Qd-o ये आपके साथ वीडियो का लिंक सांझा कर रहे हैं ताकी आप स्वयं भी देख लें । हमें इससे आपत्ति नही है, राजनीति में ऐसा पहली बार भी नही हो रहा है । लेकिन सवाल है शिक्षा और शिक्षकों का, सवाल है बच्चों के भविष्य का, सवाल है मध्यम और निचले तबके के रोजगार का । आपको याद होगा की मोदी जी ने सत्ता संभालते ही कहा था कि भारत एक युवा देश है, मतलब आप मानते तो हो कि देश में युवा लोग बड़ी तादाद में हैं लेकिन उनकी इस युवा अवस्था के लिए आपने एक भी अच्छा कार्य किया होता तो देश खुद बा खुद विकास कर रहा होता । युवा शक्ति आपके हाथ में होने के बाद भी देश बुरे दौर से गुजर रहा है । मतलब साफ है, आपने केवल युवाओं को चुनावी रैलियों की भीड़ का जरिया भर समझ लिया है । लेकिन कब तक ? युवा जवाब मांगेगा जरूर ।