उत्तराखंड समाचार: प्रदेश में संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए प्रो. हेम चन्द्र के नेतृत्व में सरकार द्वारा गठित 19 सदस्यीय उच्च स्तरीय विशेषज्ञ परिषद कमेटी  ने इसकी जानकारी दी कि आशा की किरण बनकर आई डीआरडीओ के सहयोग से तैयार की गई दवा डीजी-2 की उत्तराखंड में भी आब्जरवेशनल स्टडी की जाएगी। यह दवाई डॉ रेड्डीज लैबोरेट्रीज, हैदराबाद के सहयोग से डीआरडीओ की एक प्रयोगशाला, इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज (INMAS) में विकसित की गई है , 2-डीजी का पूरा नाम  2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज है।

डीआरडीओ के विज्ञानियों की ओर से देशभर के 47 प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों के अस्पतालों में तीन बार के जटिल क्लीनिकल ट्रायल से भी दवा गुजर चुकी है। इसके बावजूद राज्य में एक और अध्ययन के सवाल पर कमेटी के अध्यक्ष व हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड मेडिकल चिकित्सा शिक्षा के कुलपति प्रो. हेम चन्द्र बताते हैं कि दवा अभी मार्केट में उपलब्ध नहीं है।

यह दोबारा इस्तेमाल की जाने वाली दवा नहीं है और इसे बनाने का तरीका भी अनोखा है।  रिपोर्ट्स का दावा है कि यह दवा चुनिंदा रूप से संक्रमित कोशिकाओं में जमा हो जाती है और वायरस को ऊर्जा की आपूर्ति में कटौती करती है।  इसलिए, वायरस स्वचालित रूप से गुणा नहीं कर सकता है, जो संक्रमण और वायरल लोड को धीरे-धीरे कम करने में मदद करता है।  आखिरकार, कोशिकाएं ठीक हो जाती हैं।