उत्तराखंड में ऑलवेदर के नाम पर बुना गया मौत का काल अभी पता नही कितने निर्दोष लोगों की जान लेगा। जिन्होंने इस सड़क को ऑलवेदर का नाम दिया शायद उनको इसका मतलब पता नही था। सड़क निर्माण के समय तो बनाने वालों की किश्मत अच्छी थी कि बरसात ही नही हुई लेकिन फिर भी दर्जनों बेकसूर लोग मारे गये। इस सड़क निर्माण में जो नुकसान पहाड़ी क्षेत्र को हुआ उसका आंकलन नेता अभी भी नही कर पा रहे हैं। सड़क का जिस प्रकार से निर्माण किया गया है उस पर भी ध्यान नही दिया गया है। ऐसे में आने वाले समय में इस सड़क पर कितनी दुर्घनाएं होंगी कुछ कहा नही जा सकता। सवाल पूछने वाले लोगों को सरकार फट से हटा देती है तो सवाल पूछे भी कौन?

श्रीनगर-ऋषिकेश मार्ग की दशा बहुत खराब है। हाल ही में कौडियाला के पास बुलेरो के ऊपर बोल्डर गिरने से दो लोग गम्भीर रूप से घायल हो गए। इस सड़क की कटिंग गलत मानकों के साथ होने से पहले भी कई ऐसे हादसे हो चुके हैं लेकिन शासन/ प्रशासन इस घटिया निर्माण पर चुप है क्योंकि बनाने वाले कोई और नही बल्कि केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गटकरी के सुपुत्र हैं। यही वजह है कि सता के गलियारों में इन पर कोई चर्चा नही है। आईना दिखाने वाला मुख्य मीडिया पहले ही सरकार की गोद में बैठा हुआ है, इसलिए सवाल पूछे भी तो कौन ?

पहाड़ समीक्षा ने बहुत पहले एक लेख प्रकाशित किया था जिसमे यह सवाल खड़ा किया था कि ऑलवेदर सड़क पर खामोशी क्यों ? यहाँ आप रिपोर्ट पढ़ सकते हैं।  अभी भी अगर सरकार इस ओर ध्यान नही देती तो आने वाले समय में इस सड़क पर बहुत बड़ी जनहानी की सम्भावना को नकारा नही जा सकता है। अब तक आम नागरिक को हुए नुकसान का आंकलन भी सरकार सही से नही कर पाई है। इसमें पर्यावरण को जो नुकसान हुआ उस ओर भी सरकार का कोई ध्यान नही है। भगवान भरोसे चल रहे इस राज्य को अब भगवान का ही सहारा है। ईश्वर से हमारी यही प्रार्थना है कि निर्दोष लोगों को किसी प्रकार की हानि न हो लेकिन जो गुनहगार है उनकी पुस्ते तबाह हो जाएं।