कोरोना की महामारी के बीच ब्लैक फंगस नामक इस बीमारी से लोगों के हाथ पाँव फूलने लगे हैं। यह बीमारी कोरोना हुए मरीजों में देखी जा रही है। ऐसे में मुश्किलें पहले से अधिक बढ़ने वाली हैं। भारत में अब तक ब्लैक फंगस के दो सौ से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। अब तक हुए अध्ययनों के बाद चिकित्सकों का मानना है कि इस घातक बीमारी के लक्षणों को हल्के में लेना जान पर भारी पड़ सकता है। देश के अलग अलग राज्यों के अस्पतालों में पिछले कुछ समय से एक रहस्यमय संक्रमण के मामले देखे जा रहे हैं, इसे ब्लैक फंगस बताया जा रहा है।  

क्या है ब्लैक फंगस ? एम्स के निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि डॉक्टरी भाषा में इसे श्लेष्मा (म्यूकोर्मिकोसिस) के नाम से जाना जा रहा है। म्यूकोर्मिकोसिस बीजाणु मिट्टी, हवा और यहां तक कि भोजन में भी पाए जाते हैं, लेकिन वे कम विषाणु वाले होते हैं और आमतौर पर संक्रमण का कारण नहीं बनते हैं। इसका संक्रमण नाक से शुरू होता है और आंखों से लेकर दिमाग तक फैल जाता है। इस बीमारी में में कुछ गंभीर मरीजों की जान बचाने के लिए उनकी आंखें तक निकालनी पड़ती है। इस फंगस को गले में ही शरीर की एक बड़ी धमनी कैरोटिड आर्टरी मिल जाती है। आर्टरी का एक हिस्सा आंख में रक्त पहुंचाता है। फंगस रक्त में मिलकर आंख तक पहुंचता है। कई गंभीर मामलों में मस्तिष्क भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो सकता है।

क्या हैं ब्लैक फंगस के लक्षण ? फंगल इंफेक्शन से गाल की हड्डी में एक तरफ या दोनों दर्द हो सकता है। इस संक्रमण की वजह से खास कर कोविड मरीजों की स्थिति गंभीर हो रही है। डायबिटीज से पीड़ित कोविड-19 रोगियों को जिन्हें इलाज के दौरान स्टेरॉयड दिया जा रहा है, उनमें म्यूकोर्मिकोसिस या ब्लैक फंगस से प्रभावित होने की आशंका अधिक होती है। इस वायरस के चलते मरीज की आंखों में हल्का सूजन या देखने में दिक्कत का होना जैसे लक्षण आम है। फंगल इंफेक्शन मस्तिष्क को भी प्रभावित करता है, जिससे भूलने की समस्या, न्यूरोलॉजिकल समस्याएं आ सकती हैं।

सावधानी क्या रखें ? धूल जैसे स्थानों पर बिना मास्क के न जाए और अगर आप कोरोना से सुरक्षित हैं तो बेवजह बाहर न जाए। किसी काम की वजह से बाहर जाना पड़े तो मास्क से अच्छे से मुह को ढके और हो सके तो आंखों पर भी चश्मा लगा कर निकले। इस समय में ठंडे पानी का उपयोग बिल्कुल न करें, नियमित गर्म पानी का सेवन करें। श्वसन प्रणाली को दुरुस्त रखने के लिए सांस सम्बन्धी योगा करें। किसी तरह की दिक्कत पर डॉक्टर से सुरवाती दिनों में ही परामर्श लें।