कोरोना महामारी के चलते अभी तक पीपीई किट या बारात की संख्या में कमी की खबरें सुनने को मिलती रही हैं। पर अब महामारी ने विवाह की रस्मों का फेरबदल करने वाला ये पहला किस्सा है। जी हाँ, खबर उत्तराखंड के चंपावत से सामने आ रही हैं जहाँ शुक्रवार को जिले के एक गांव में ऐसा ही एक अनोखा मामला देखने को मिला, जब दुल्हन बारात लेकर दूल्हे के घर पहुंची। पूरे रीति-रिवाज के साथ विवाह की सारी रस्में संपन्न हुईं। इसके बाद दुल्हन ससुराल में रुक गई और सभी के साथ माता-पिता वापस घर जाकर होम आइसोलेट हो गए। क्या है पूरी खबर विस्तार से पढ़ए..

पूर्व प्रधान ईश्वरी दत्त भट्ट ने बताया कि स्वाला गांव निवासी ईश्वरी दत्त (25) पुत्र स्व. दिलेराम की शादी कुछ समय पूर्व रायनगर चौड़ी, लोहाघाट निवासी प्रीति पुत्री केशव दत्त के साथ तय हुआ। शादी के लिए दोनों परिवारों ने तैयारियां शुरू कर दी। कोरोना का प्रकोप ऐसा बढ़ा कि स्वाला गांव में चार दिन पूर्व एक साथ 47 लोगों के कोरोना पॉजिटिव होने के बाद प्रशासन ने उसे माइक्रो कंटेनमेंट जोन बना दिया। इससे शादी को लेकर दूल्हा और दुल्हन पक्ष के लोग असमंजस में पड़ गए। दूल्हे के बारात लेकर लोहाघाट न जाने पर दुल्हन पक्ष ने इसका हल निकाला। काफी मंथन करने के बाद दुल्हन पक्ष के लोगों ने स्वाला गांव पहुंच कर विवाह करने पर सहमति बनी। इसके बाद दूल्हे के भाई बीडीसी सदस्य हेम चंद्र ने विवाह करने को लेकर प्रशासन से अनुमति ली। प्रशासन ने मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए दुल्हन पक्ष को सीमित संख्या में जाकर शादी करने की अनुमति दी। इसके बाद शुक्रवार को लोहाघाट से दुल्हन प्रीति, मां चंचला देवी और पिता केशव दत्त स्वाला गांव पहुंचे। यहां सादे समारोह में प्रीति और केशव शादी के बंधन में बंध गए। पुरोहित लक्ष्मी दत्त जोशी शादी की विभिन्न रस्में कर शादी कराई। 

तहसीलदार ज्याेति नपच्याल ने बताया कि मानवीय पहलू को देखते हुए स्वाला में बने माइक्रो कंटेनमेंट जाने में शादी किए जाने की अनुमति दी गई। कन्या पक्ष के तीन लोगों को ही गांव में जाने के लिए अनुमति दी। दुल्हन के माता-पिता को 14 दिन तक लोहाघाट में होम आइसोलेशन में रहने के निर्देश दिए गए थे इसलिए सात फेरे लेने के बाद दुल्हन प्रीती ससुराल में ही रुक गई जबकि माता पिता घर जाकर होम आइसोलेट हो गए।