उत्तराखंड के टिहरी जिले में दो जगह बादल फटने से भारी नुकसान हुआ है। भरपूर पट्टी के बौठ गांव में भी बादल फटने से दो मकान क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि पैदल मार्ग और कुछ खेत बह गए। इस पूरी घटना से प्रशासन अवगत है। दूसरी तरफ बादल फटने से देवप्रयाग में बरसाती नदी में आया उफान बाजार पर भारी पड़ा। इससे 10 दुकानों के साथ ही आइटीआइ भवन मलबे में तब्दील हो गया। गनीमत रही इन दिनों कोविड कफ्र्यू के चलते बाजार बंद था। इससे जान का नुकसान नहीं हुआ। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने अधिकारियों से संपर्क कर हालात का जायजा लिया और जिला प्रशासन से नुकसान की रिपोर्ट तलब की है।

घटना मंगलवार शाम करीब पांच बजे की है। देवप्रयाग से कुछ दूर दशरथ पर्वत के आसपास बादल फटने से देवप्रयाग बाजार के बीच से बहने वाली शांता नदी में उफान आ गया। पहाड़ से बहकर आए विशाल पत्थर और मलबे की चपेट में आने से दुकानें ध्वस्त हो गईं। इनमें ज्वैलरी शाप, कंप्यूटर सेंटर, मिठाई और फर्नीचर की दुकानें शामिल हैं। इस दौरान बाजार में मौजूद एक सुरक्षा कर्मी ने भागकर जान बचाई।

जहां राज्य में एक ओर कोरोना से हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं वहीं दूसरी तरफ मौसम के तेवर तल्ख हैं। पहाडों पर बारिश आफत बन बरस रही है। राज्य में बादल फटने की घटनाओं से नदी नाले उफान पर हैं। टिहरी जिले में ही नरेंद्रनगर ब्लॉक के दोगी पट्टी क्षेत्र के ग्राम पंचायत क्यारा में अतिवृष्टि से तीन मकान क्षतिग्रस्त हो गए। ग्राम प्रधान सुल्तान सिंह के अनुसार तेज बारिश के बीच गांव के पास बह रही बरसाती नदी में बाढ़ आने से नुकसान हुआ है। दहशत में ग्रामीण सुरक्षित स्थान पर चले गए। हालांकि शाम तक लोग गांव लौट गए। उत्तराखंड राज्य इस समय कई प्रकार की मार एक साथ झेल रहा है, ऐसे में केंद्र सरकार को राज्य के नागरिकों के हित में स्पेशल पैकेज जारी करना चाहिए। पहाड़ी क्षेत्र में पहले ही रोजगार की कोई सुविधा नही है ऐसे में लोगों के मकान व दुकानों को होने वाले नुकासन की भरपाई सरकारी राहत कोष से तुरंत हो जानी चाहिए।