वैक्सीन की उपलब्धता की कमी के चलते ऋषिकेश में 45+ का टीकाकरण बन्द, कैसे होगी कोरोना से मुक्ति ?

कोरोना से राज्य में हाहाकार है और सरकार के पास कोरोना से मुक्त लोगों को बचाने के लिए टीका नही है। यह हाल उस राज्य का है जिसमें भाजपा की सरकार है और आगामी वर्ष विधानसभा का चुनाव होना है। यह इसलिए लिखना पड़ा क्योंकि भाजपा मौके भुनाने में माहिर मानी जाती है। अगर यह स्थिति इस राज्य की है तो गैर भाजपाई राज्यों को तो वैक्सिनेशन सपने जैसे लगता होगा। क्या होगा उत्तराखंड राज्य का अगर राज्य में ऐसे ही नकारे लोग सत्ता में बने रहे। कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए भारत सरकार के टीकाकरण महा अभियान को राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश में दो दिन से ब्रेक लगा हुआ है। यहां वैक्सीन का स्टॉक अब तक उपलब्ध नहीं हो पाया है। ऋषिकेश राजधानी के सबसे पास है फिर भी दो दिन से टीका उपलब्ध नही है तो पहाड़ी क्षेत्रों में क्या दशा होगी ? जिन लोगों को पहला टिका लग चुका है क्या उनको समय पर दूसरा टीका मिल पाएगा ? अब तो टीका भी विवादों में आ गया है। पहले दूसरी डोज 6 से 8 सप्ताह के भीतर सुरक्षित बताई जा रही थी लेकिन उसके बाद अचानक 12 सप्ताह तक वैध हो गई और जैसे जैसे टीके की खपत बढ़ने लगी तो भारत में दूसरे टीके का समय 16 हप्ते कर दिया गया है, जबकि वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन इसको अभी भी 12 सप्ताह तक ही सुक्षित बता रहा है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के सुझाव के बाद मोदी जी की नींद खुल तो गई है लेकिन अभी भी फॉर्मूला शेयर करने के बाद टीका कितनी तेजी के साथ बाजार में आएगा कुछ कहा नही जा सकता है। डीआरडीओ की मदद से बनने वाली दवाई DG (डीजी) भी कब तक लोगों के पास पहुंचेगी इसका भी कोई आंकलन नही है। शायद इसके लिए भी मोदी जी को याद दिलवाना पड़ेगा कि कम्पनी से कहिए फॉर्मूला शेयर करे और अधिक मात्रा में DG का उत्पादन करे।

खैर, देहरादून रोड स्थित राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 18 प्लस आयु वर्ग वालों के लिए अलग से टीकाकरण केंद्र खोला गया है। हेल्थ सुपरवाइजर एसएस यादव ने बताया कि शनिवार को यहां 300 टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया था। जिसमें 289 व्यक्तियों को टीका लगाया गया। यहां मौजूद नर्सिंग अधिकारी राहुल सक्सेना ने बताया कि युवाओं में टीकाकरण को लेकर बेहद उत्साह है।