देश में जहां कोरोना वैक्सीन को लेकर संदेह बना हुआ है वहीं दूसरी तरफ कम्पनी अब वैक्सीन सीधे प्राइवेट हस्पतालों को देने का प्लान बना रही है। बात कुछ समझ तो नही आ रही क्योंकि अभी तक वैक्सीन की शॉर्टेज थी फिर अचानक निजी हस्पतालों के लिए वैक्सीन कहाँ से आई ? लेकिन इस बुरे दौर में वैक्सीन मिल जाए वही बहुत बड़ी बात है। सीरम इंस्टीट्यूट निजी अस्पतालों को सीधे वैक्सीन देने की तैयारी कर रहा है। यह डोज आपको 600 रुपये प्रति डोज के हिसाब से मिलेगी, कुल मिलाकर 1200 रुपये में आपको दो खुराक दवा दी जाएगा। आइए पहले पूरी खबर पढ़ लीजिए, अंत में आपको इसकी हकीकत से रूबरू करवाएंगे।

आइएमए के प्रदेश महासचिव डॉ. अजय खन्ना ने सभी जिला शाखा को पत्र लिखकर अस्पतालों की सूची उपलब्ध कराने को कहा है। दरअसल, जनवरी से अप्रैल तक निजी अस्पतालों में भी टीकाकरण चल रहा था। इन अस्पतालों को वैक्सीन सरकार की तरफ से मिल रही थी। पर 18-44 आयुवर्ग का टीकाकरण शुरू होने के साथ ही यह व्यवस्था खत्म हो गई। निजी अस्पतालों को अब कंपनी से खुद ही टीका खरीदना होगा। सीरम इंस्टीट्यूट निजी अस्पतालों को सीधे वैक्सीन देने की तैयारी कर रहा है। डॉ खन्ना ने बताया कि निजी अस्पतालों को कोविशिल्ड की एक खुराक 600 रुपये में मिलेगी। राज्य के जो अस्पताल इसके लिए इच्छुक हैं वह आइएमए से संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि आइएमए की सभी जिला इकाइयों से अस्पतालों की सूची मांगी गई है।  

क्या है इसका फायदा ? कोरोना ले इस दौर में जब चारों तरफ लूट मची हुई है, एक रेमडिसिवर इंजेक्शन 30 हजार का बिक रहा है। ऐसे में जरूरी है कि जल्दी से जल्दी वैक्सिनेशन पूरा हो। यह एक अच्छा और सार्थक कदम है कि वैक्सीन निजी व सरकारी दोनों हस्पतालों को दी जाए, जिससे जल्दी से जल्दी लोग वैक्सीनेट हों और मृत्यु दर पर नियंत्रण पाया जा सके। जहां लोग अपनो को बचाने के चक्कर में लाखों रुपया खर्च कर रहे हैं वहाँ 1200 रुपया कोई बहुत बड़ी बात नही है। लेकिन समाज में एक तबका ऐसा भी है जिसके पास दवा खरीदने के लिए 200 रुपया भी नही है, ऐसे में सरकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे लोगों के टीकाकरण की व्यवस्था भी सीघ्र पूरी की जाए।

क्या है वैक्सीन की शॉर्टेज का माजरा ? अभी तक यह सामने आ रहा था कि वैक्सीन का उत्पादन इतना नही है कि हर राज्य को दिया जा सके लेकिन अचानक निजी हस्पतालों को देने के लिए वैक्सीन कहां से आई, ये एक बड़ा सवाल है । दरअसल, कम्पनी केंद्र को यही दवा 150 में दे रही है, राज्य को 300 में और निजी हस्पतालों को भी लगभग 450 के आसपास में मिल जाएगी, ऐसे में एक सवाल यह भी है कि एक ही देश में तीन-तीन रेट क्यों ? आखिर प्रधानमंत्री केयर फंड का पैसा इस वक्त पे जनता के काम क्यों नही आया ? ये सब सवाल बहुत लोगों के दिमाग में चल रहे होंगे, लेकिन एक बड़ा सच यह भी है कि कोई भी कम्पनी घाटे के लिए क्यों काम करेगी ? कम्पनी को क्या फर्क पड़ता है कि किसको वैक्सीन लगी और किसको नही । प्रधानमंत्री इस संकट की घड़ी में अपने हाथ खड़े कर चुके हैं ऐसे में सारी बात राज्यों के ऊपर आ चुकी है कि वह अपने नागरिकों की कैसे मदद करेंगे। अधिकांश ने पहले ही हाथ यह सोकर पीछे खींच लिए कि जब केंद्र को 150 की मिल रही है तो राज्य 300 की क्यों खरीदे। बात कुछ हद तक सही भी है, लेकिन इस वक्त प्राथमिकता जनता को बचाना है और जनता इस समय पैसा खर्च करेगी ये बात देश के प्रधानमंत्री जी जानते हैं। इसलिए जनता की जेब से कम्पनी को हुआ वो घाटा जिसमें केंद्र को वैक्सीन 150 प्रति डोज मिली, पूरा किया जाएगा। अब ये देश के प्रधानमंत्री ही जाने की उन्होंने वैक्सीन किसको लगाई और किसीको नही, बस ये बात जरूर खल रही है कि 06 करोड़ वैक्सीन में कम से कम उस वर्ग को वैक्सीन मिल जाती जो आज कमाता है और आज खाता है।

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