रुड़की के हनुमान कॉलोनी निवासी अनीता शर्मा ने बताया कि उसकी 40 वर्षीय बहन को खांसी और बुखार की शिकायत थी। चार अप्रैल को उन्होंने सिविल अस्पताल रुड़की में कोरोना के संदेह पर बहन की आरटीपीसीआर जांच कराई थी। पर, जांच रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद चेहरे पर सूजन बढ़ गई। एक साइड का चेहरा लाल हो गया। एक चिकित्सक से उपचार कराया तो उन्होंने बताया कि नसों में दिक्कत है। दो-तीन दिन उपचार के दौरान ही उसकी बहन की एक आंख से दिखना बंद हो गया। साथ ही चेहरे पर एक साइड की त्वचा गहरी लाल और सूज गई। नाक की एक साइड से खून बहने लगा। एक साइड चेहरे का पूरा हिस्सा सुन हो गया। दिमाग भी ठीक तरह से काम नहीं कर रहा था। वह बोलना कुछ और चाह रही थी और बोल कुछ और रही थी। इसके बाद उन्होंने एक अन्य चिकित्सक को दिखाया।  

चिकित्सक ने सीटी स्कैन सहित अन्य जांच कराई। चिकित्सक ने बताया कि उन्हें ब्लैक फंगस की आशंका है, इसलिए वह किसी हायर सेंटर में अपनी बहन को ले जाएं। शनिवार को वह अपनी बहन को जौलीग्रांट अस्पताल ले गए। उन्होंने नाक से बह रहे खून और सीटी स्कैन सहित अन्य जांच कराई। जौलीग्रांट के चिकित्सक ने रिपोर्ट देखने के बाद आज हो ने बताया कि उनकी बहन को ब्लैक फंगस हुआ है। उनका ऑपरेशन होगा।  

दूसरी तरफ कुछ दिन पहले देहरादून से एम्स में एक युवक रेफर करवाया गया था। युवक कोरोना संक्रमित  था। जांच के दौरान युवक में ब्लैक फंगस के संक्रमण की पुष्टि हुई थी। 36 साल के उस युवक की ब्लैक फंगस से शुक्रवार दोपहर को मौत हो गई थी, लेकिन इसकी जानकारी रविवार को सामने आई। इस बीच ब्लैक फंगस के संदिग्ध लक्षणों के चलते कई बारी मरीजों की भी जांच की गई। जिनमें ये संक्रमण पाया गया है। प्राप्त जानकारी ले अनुसार उनमें  से 12 मरीज उत्तराखंड के हैं।