उत्तराखंड में कोरोना की रफ्तार कम होने का नाम नहीं ले रही है, बल्कि नए मरीजों की संख्या हर दिन तेजी से बढ़ती जा रही है। स्थिति की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मंगलवार को पहली बार प्रदेश में कोरोना के 7028 मामले आए हैं। जबकि 85 मरीजों की मौत भी हुई है। चिंता की बात इसलिए भी है कि सैंपल पॉजिटिविटी रेट 18.47 फीसद रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, देहरादून में कोरोना के 2789 मामले आए। ऊधमसिंह नगर में 833, नैनीताल में 819 व हरिद्वार में 657 लोग संक्रमित मिले हैं। इसके अलावा पौड़ी गढ़वाल में 513, पिथौरागढ़ में 231, बागेश्वर में 215, टिहरी गढ़वाल में 200, अल्मोड़ा में 170, चंपावत में 163, उत्तरकाशी में 153, चमोली में 150 व रुद्रप्रयाग में 135 मामले आए हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा है कि कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए कोरोना कर्फ्यू को सख्त करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अमूमन यह देखने में आ रहा है कि सब्जी मंडी में भी भीड़ उमड़ रही है। मास्क के प्रयोग को लेकर बेपरवाही है। ऐसे में सख्त कदम उठाने जरूरी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लाकडाउन से कोरोना की चेन टूटेगी, मगर सरकारों को सभी तरह की व्यवस्था देखनी होती है। पूर्व मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि जो लोग गांव लौट रहे हैं, उनके लिए यह सुनिश्चित करना होगा कि वे ग्राम स्तर बने क्वारंटाइन सेंटर में कम से कम पांच दिन अवश्य रहें। इसके साथ ही ग्राम प्रधानों को अधिक अधिकार देने की जरूरत है। यदि कोई कोविड की गाइडलाइन का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति ने आरटी पीसीआर कराया है, तो वह रिपोर्ट आने तक घर पर ही आइसोलेशन में रहे। उसकी निगरानी की व्यवस्था होनी चाहिए।