मोदी  अब तक चुनाव में सिर्फ दो लोगों के आगे हारें हैं और इतनी बुरी तरह से हारे हैं कि उसके बाद मुह छुपाते फिरते रहे। चुनाव हारने पर हर बार जिम्मेदार मुस्लिम वोटरों को ही माना जाता है। लेकिन सच कुछ और ही है, दरअसल मोदी अपनी छवि ऐसी बना चुके हैं कि अब जनता उनको चुनावी रैलियों के प्रधानमंत्री कहने लगे हैं। बात कुछ हद तक सही भी है, हर राज्य चुनाव में प्रधानमंत्री का कूदना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। इसलिए अब मोदी की लोकप्रियता पर धीरे धीरे संकट मंडरा रहा है। भारत की जनता अब उनको भाजपा की भाषा में ही गरियाने लागी है। बंगाल में मिली हार का ठीकरा भले ही कुछ बिकाऊ पत्रकार बंगाल की मुस्लिम आवादी पर फोड़ रहे हो लेकिन सच यह है कि ममता को वोट हिन्दू और सिखों की तरफ से भी खूब पडे हैं। आपको बता दें कि बंगाल में सिर्फ 30% मुस्लिम आवादी है और 70% पर हिन्दू और अन्य, दीदी का वोट प्रतिशत 65% से भी अधिक का है तो आखिर इतने वोट आये कहाँ से ? जबकि चुनाव आयोग भी भाजपा की तरफ से बैटिंग कर रहा था फिर भी सच को स्वीकार करने के बजाय हार का कारण मुसलमानों को बताना भाजपा की नाकामी को दर्शाता है।

दीदी कैसे जीती ?
दरअसल बंगाल चुनाव में भाजपा ने शुरुआत जय श्रीराम से की जिसके बदले में ममता दीदी ने दुर्गा स्त्रोत्र की कुछ लाइन पढ़ डाली और बंगाल में दुर्गा पूजन का क्या महत्व है ये बंगाली भली प्रकार से जानते हैं। उसके बाद जेपी नड्डा के काफिले पर हमला हुआ आरोप लगा की हमला टीएमसी कार्यकर्ताओं ने किया, तो बदले में ममता दीदी ने अपनी टांग तुड़वाली और आरोप भाजपा कार्यकर्ताओं पर लगा। मझेदार बात ये है कि नड्डा की गाड़ी और ममता की टांग कैसे टूटी किसी को कुछ पता नही। ममता दीदी जानती थी कि अगर चुनाव जितना है तो भाजपा को उसी की भाषा में एनकाउंटर करना पड़ेगा। इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने भी दिल्ली में यही फॉर्मूला अपनाया था। मौजूदा स्थिति में भारत की राजनीति में दो ही खिलाड़ी ऐसे हैं जो मोदी को हरा सकतें हैं क्योंकि उनको मोदी की भाषा में काम करना आता है।



अब ममता दीदी का एक टांग के साथ फुटबॉल खेलने वाला वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें फुटबॉल सीधे मोदी को लगता है और मोदी जमीन पर गिर पड़ते हैं। मोदी विरोधी खेमे ने इस वीडियो के माध्यम से उनकी करारी हार को दर्शाया है कि कैसे मोदी एक टांग वाली महिला के सामने तिनके की तरह लड़खड़ा गये। भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह की हवा भी बंगाल चुनाव के बाद टाइट है। कई राजनीतिक विशेषज्ञ कह रहे हैं कि चुनाव आयोग के भाजपा की तरफ से बैटिंग करने के बाद भी जिस तरह से भाजपा की हार हुई है, वह दर्शाता है कि अमित शाह केवल चुनावी भीड़ जुटाने का जरिया है और भीड़ को पैसों से जुटाया जाता है। बंगाल हार के बाद कई विपक्षी नेता यह भी कह रहे हैं कि अमित शाह अच्छे नेता कभी थे ही नही और न होंगे। उनका विरोधी मीडिया उनके लिए 'तड़ीपार' शब्द का इस्तेमाल अक्सर करता है और बंगाल चुनाव में पूरी ताकत झोंकने के बाद मिली हार से उनके पार्टी में सर्वोच्च स्थान पर भी कई सवाल उठने लगे हैं।