आज की स्थिति पर देश के पूर्व राष्ट्रपति कलाम सहाब की एक लाइन याद आती है कि "जो सपना देखो उस पर हर दिन एक कदम आगे बढ़ो" लेकिन यहाँ तो सपने दिखाने वाले ही इतने झूठे हैं कि जनता अगर उनके एक कदम आगे बढ़ने में साथ भी दे तो अगले ही दिन जनता उनसे दो गज दूर हो जाती है। सत्ता की चाह में जनता को क्या क्या सपने नही दिखाए लेकिन जब जनता की आंख खुली तो सपने लाशों में बदलने लगे। कभी न बोलने वाली जनता भी यह पूछने लगी की कहाँ है वो बुलेट ट्रेन का ख्वाब दिखाने वाला उसको कहो कि हस्पतालों की ऑक्सिजन खत्म हो रही है। आपके देश के नागरिक सड़कों पर मर रहें है और उनको ढोने के लिए एम्बुलेंस भी नही हैं। बहुत जी लिए सपनों में अब आँख खोलो और लोगों की पीड़ा को महसूस करो। रोते बिलखते उन लोगों की चीख-पुकार सुनो जिन्होंने अपने घर के चिराग खो दिए। सत्ता की चाह में आप कहा करते थे मेरे 130 करोड़ देशवासियों मुझे आशीर्वाद दो और आज तुम्हारी बारी है तो तुम खामोश बैठे हो।

विकास की ऐसी परिभाषा कि जिसमें ऑक्सिजन जैसी मामूली बात के लिए दूसरे देशों की तरफ देखना पड़े, कहाँ पढ़ी आपने? 130 करोड़ देशवासियों कहते हुई जब आपको संकोच नही तो गैर बीजेपी शासित राज्यो के साथ ऑक्सिजन और दवाओं के वितरण में भेद भाव क्यों, ये पूछ रहा है देश। आखिर आपका गणित इतना कमजोर क्यों है कि एक बिहार रैली पर फूंकने के लिए आपके पास 130 करोड़ रुपया था लेकिन भारत की 130 करोड़ जनता पर कोरोना काल में 01 लाख प्रति व्यक्ति खर्च करने का दम नही। यही रैली वाला पैसा आप जनता में बांट देते तो 01 करोड़ रुपया एक व्यक्ति के हिस्से में आ जाता तो शायद लोग खुद के लिए ऑक्सीजन और अन्य उपयोग दवा खरीद पाते।

भेष बदलने से वोट तो मिल सकता है मान्यवर लेकिन देश नही चल सकता, इस बात को समझिए। विनम्रता ही इंसान का आभूषण है। गांधी आधे नंगे ही विश्व प्रसिद्ध हो गए थे इस बात को मत भूलिए। इसलिए जहां तक बात है भेष भूषा की तो नरेंद्र मोदी ही रहिए, यूं बार बार गेटप बदलने से कुछ नही होता। आपकी महानता केवल इसी में है कि एक राजा के तौर पर आप प्रजा के हितों में कितने प्रतिबद्ध रहे, वरना आपसे पहले भी कितने ही प्रधानमंत्री आके चले गये और आपके बाद भी कई आके चले जाएंगे। याद वही रहेंगे जिनके अच्छे कार्य लोगों के दिलों में घर कर जाएंगे। जनता के पास जनता के मुद्दे लेकर आइए, भारत-पाकिस्तान या भारत चीन के नही। आप राजा हैं और राज्य की सुरक्षा करना आपका कर्तव्य है इसके लिए जनता में जाकर वाह वाही लूटना एक अच्छे राजा की शोभा नही है क्योंकि आपके पास सेना के रूप में भारत की तीन-तीन सेनाएं हैं। जनता आपको देश चलाने के लिए कर (टैक्स) चुका रही है बदले में आपसे उचित मैनेजमेंट मांग रही, इससे ज्यादा कुछ नही।