उत्तराखंड सरकार की महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास राज्यमंत्री रेखा आर्य ने मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को पत्र भेजकर ऐसे अनाथ बच्चों को 18 साल की आयु तक प्रतिमाह ढाई हजार रुपये की राशि मुहैया की जाने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि उनका यह निर्णय भी दिल्ली सरकार के निर्णय के बाद लिया गया है। क्योंकि दिल्ली सरकार के इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण के बाद उत्तराखंड सरकार ने भी ऐसे लोगों का आंकड़ा एकत्रित करना शुरू कर दिया था, लेकिन इन बात को आठ दस दिन बीत गये हैं फिर भी उत्तराखंड सरकार मौन है। 

उत्तराखंड की वर्तमान भाजपा सरकार में किसी भी नेता की बात का विश्वास करना इतना आसान इसलिए भी नही है क्योंकि पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत ने कोरोना से मृतकों के परिजनों को 01 लाख को सहायता की बात कही थी लेकिन जब इस पर वर्तमान मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत से सवाल किया गया तो उन्होंने यह कह कर पल्ला झाड़ दिया कि मुझे इस बात की जानकारी नही है। अब महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य का यह पत्र क्या रंग लाएगा ये तो वक्त ही बातएगा।

इसमें रेखा आर्य ने जो शर्त रखी है उसको देखते हुए तो पहले ही साफ है कि यह पैसा किसी को नही मिलने वाला है। रेखा आर्य ने कहा है कि कोरोना महामारी में जिन बच्चों के माता-पिता की मौत हो चुकी है सरकार उनके लिए बेहद चिंतित है। इसलिए जो इन बच्चों का संरक्षण कर रहा अभिभावक होगा उसको 2000 रुपया प्रति माह भरण पोषण के लिए दिया जाएगा लेकिन शर्त यह है कि उस व्यक्ति (अभिभावक) की आमदनी 2400 प्रति माह से कम होनी चाहिए। अब आप समझ सकते हैं कि सरकार पहले ही साफ कर रही है कि भाई ऐसे बच्चों का संरक्षण मत करना अगर आपकी आमदनी ठीक है। क्योंकि अगर आपकी आमदनी ठीक है तो बच्चा न तो आपका खाना खाएगा और न ही आपके पैसों से शिक्षा लेगा। वह तो सरकारी स्कूल में जाएगा और एक वक्त का खाना खाएगा और बिना कुछ ज्ञान अर्जित किये ही घर लौट जाएगा। 

अब आप समझ ही सकते हैं कि सरकार कितनी चिंतित है। आपको लेकर नही, सरकारी पैसों को लेकर। जनता का पैसा और जनता के लिए ही शर्तें, वाह! क्या बात है। मुख्यमंत्री जी समझदारी से काम लें तो उनको पत्र के जवाब में लिखना चाहिए, श्रीमती रेखा आर्य जी हम आपको 2500 रुपया महीना देते हैं और आप मंत्री पद से स्तीफा दे दीजिए। 2500 में आप अपने बच्चों का भरण पोषण व शिक्षा कर दीजिए। शर्म नही आती इन नेताओं को जब पांच लीटर तेल 900 रुपए का हो गया तब ये 2500 की मदद पर भी शर्तें लगा रहे हैं।

रेखा आर्य जी आपने यह कैसे मान लिया कि राज्य में केवल ऐसे परिवारों के बच्चे हो अनाथ हुए होंगे जिनकी आमदनी 2400 प्रति माह से कम है? उनका क्या जिनके नौकरी पेशे वाले माँ बाप मर गये।  ऐसे मौकों पर सरकारी पैसे से सहायता होती है न की आमदनी। राज्य में अगर आज भी ऐसे लोग हैं जिनकी आमदनी 2400 प्रति माह से कम है तो आपकी और पिछली सरकारों के लिए डूब मरने जैसी स्थिति है। लेकिन आपने कहा है तो होगी जरूर, फिर भी आपके राज में 200 प्रति लीटर तेल, 830 रुपये का गैस और 330 रुपये का 10 किलो आटा बिक रहा है।