हल्द्वानी शहर के युवा टैंट कारोबारी ललित पांडे का कोरोना संक्रमण से निधन हो गया। गरीबी से लड़कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में अहम भूमिका निभाने वाले ललित कोरोना महामारी से जंग हार गए। उनके निधन का समाचार मिलते ही कोराबारियों, जनप्रतिनिधियों में शोक की लहर दौड़ गयी है। हिम्मतपुर तल्ला में रहने वाले ललित पांडे का घर के पास ही ऊँ झंकार नाम से टैंट हाउस था। तीन भाइयों में सबसे छोटे ललित कैटरिंग का कारोबार भी करते थे। इसके साथ ही उन्होंने कमलुवागांजा रोड पर गंगोत्री बैंक्वेट हाल व स्वयंवर बैंक्वेट हाल पर लीज पर लिया था। कुछ दिन पहले उनके तबियत बिगड़ी। कोरोना जांच कराने पर वह पाजीटिव आए। सांस लेने में दिक्कत होने पर उन्हें मुखानी स्थित विवेकानंद हास्पिटल में भर्ती कराया गया था। यहां सोमवार की सुबह ललित का निधन हो गया। टैंट कारोबारियों के मुताबिक कुछ सालों पहले तक ललित के परिवार की आर्थिक स्थिति कुछ कमजोर थी। अपनी मेहनत व व्यवहार के की वजह से ललित ने अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ ही समाज में अच्छी ख्याति प्राप्त कर ली थी। महानगर टैंट एसोसिएशन व पूर्व ब्लाक प्रमुख भोला दत्त पांडे ने ललित के निधन पर गहरा दु:ख जताया है।

दून में कोरोना से जिन व्यक्तियों की मौत हो रही है, उनका अंतिम संस्कार कोविड-19 प्रोटोकॉल के तहत रायपुर स्थित श्मशान घाट में किया जा रहा है। राज्य सरकार के हेल्थ बुलेटिन में रोजाना दर्ज हो रहे मौत के आंकड़ों के अनुरूप इस श्मशान घाट में अंतिम संस्कार का दबाव भी दिख रहा है। मगर, इस सबके बीच जो बात असामान्य है, वह यह कि अन्य श्मशान घाटों में भी अंतिम संस्कार का आंकड़ा बढ़ रहा है। सामान्य दिनों की अपेक्षा बीते एक माह में यह आंकड़ा तीन गुना से अधिक हो गया है। एकाएक हुई इस बढ़ोतरी को सामान्य तो कतई नहीं माना जा सकता। ..तो क्या यह मान लिया जाए कि कोविड प्रोटोकॉल से इतर जिनका अंतिम संस्कार किया जा रहा है, उन पर भी कोरोना का साया पड़ा है और संबंधित व्यक्तियों या उनके स्वजनों ने कोरोना की जांच नहीं कराई?