सोमवार को प्रदेश सरकार के रवैए से नाराज होकर मुख्य परिवहन कंपनी यातायात और पर्यटन विकास सहकारी संघ और टिहरी गढ़वाल मोटर ऑनर्स कारपोरेशन के अंतर्गत संचालित होने वाली बसों के मालिकों ने अपने वाहनों के प्रपत्र सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय को सौंप दिए। कोरोना काल में आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवहन व्यवसायियों को सरकार से राहत की बड़ी उम्मीद थी। कैबिनेट की बैठक में इसे लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया।

यातायात कंपनी के उपाध्यक्ष नवीन रमोला ने कहा कि वाहन स्वामी मुख्यमंत्री, सरकार के मंत्रियों के समक्ष सहायता की गुहार लगा चुके हैं। कैबिनेट में प्रस्ताव लाने का भरोसा दिया गया था मगर कोई राहत नहीं मिली है। यदि सरकार दो साल का कर माफ कर देती है। साथ में किराया वृद्धि करते हुए मालिक, चालक और परिचालक को मुआवजा देती है तो ही बस मालिक वाहनों के संचालन करने की स्थिति में होंगे। 

पिछली कोरोना लहर में 50% सवारी बढ़े किराए के साथ जैसे तैसे बस मालिकों ने गुजारा किया और सरकार का पूर्ण सहयोग किया लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में 50% सवारी के साथ बिना किराया बढ़ाए बसों का चल पाना नामुमकिन है। अधिकांश पहाड़ी सड़कों पर पहले ही सवारी पर्याप्त न होने के कारण निजी बस मालिक घाटे में चल रहे हैं। अब इस प्रकार से अगर 90 रुपये प्रति लीटर डीजल के साथ वाहन 50% सीटों पर चलाना पड़े तो ये खुदखुशी जैसा कदम होगा।