आज कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है।  दुनियाभर में 16 करोड़ से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं।  कोरोनावायरस के कारण 34 लाख से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है।  वहीं इससे पहले भी इतिहास में कोरोना जैसी कई भीषण महामारियां आ चुकी थीं।  हाल ही में, बोस्टन के पुस्तकालय और पुरालेख ने एक मंत्री की डायरी और कई डिजिटल रिकॉर्ड ऑनलाइन पोस्ट किए।  1980 में, विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक शाखा ने चेचक की महामारी को पूर्ण रूप से समाप्त करने की घोषणा की।  स्वाभाविक रूप से, 1980 के दशक के बाद से चेचक का कोई मामला सामने नहीं आया है।  तदानुसार, महामारी 1700 में उठी और 1980 में समाप्त हुई। महामारी को पूरी तरह से समाप्त होने में लगभग 280 वर्ष लगे।

अभिलेखों के अनुसार 1700 के आसपास चेचक नामक महामारी फैली थी। इस महामारी का प्रभाव इतना भयानक था कि उस दौरान इसके विनाशकारी प्रभावों के कारण हजारों लोगों की जान चली गई थी।  इससे कई लोग संक्रमित हुए थे।  उस समय इस महामारी से लड़ने के लिए कोई टीका या बेहतर इलाज उपलब्ध नहीं था।  रिकॉर्ड के मुताबिक, महामारी का भयानक असर अमेरिका के तटों से दूर के इलाकों पर पड़ा।

अब चेचक को लगभग तीन सौ वर्ष बीत चुके हैं और मानव सभ्यता एक नई महामारी कोरोना का सामना कर रही है।  इसी कड़ी में 3 सदी पहले हुई चेचक और अब कोरोना की महामारी में समानता देखकर कई विशेषज्ञ हैरान हैं। न्यू इंग्लैंड हिस्टोरिक वंशावली सोसायटी के लिए काम करने वाले बोड़नार कहते हैं-इतने सालों बाद भी हम बहुत कम बदले हैं। अपने एक इंटरव्यू में बोड़नार कहते हैं कि 17वीं सदी की चेचक महामारी और कोरोना महामारी के बीच हम अपने पिछले रिकॉर्ड में समानताएं खोज रहे हैं। यह काफी दिलचस्प रूप में समानांतर प्रक्रिया है। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि चेचक महामारी का आखिरी भयानक असर साल 1949 में देखा गया था। वहीं जब तक इसका इलाज खोजा गया तब तक इसने लाखों लोगों की जान ले ली थी।