प्लास्टिक पर प्रतिबंध के तमाम विकल्प फेल होते नजर आ रहें हैं। दुनियां भर में कई देश इस समस्या से खुद को बाहर निकालना चाहते है। लेकिन तमाम प्रयासों के बाद वह ऐसा नही कर पा रहें हैं क्योंकि आयात किए गये समान के साथ किसी न किसी रूप से प्लास्टिक आ ही जाता है। यही दशा भारत की भी है। कई सालों से प्लास्टिक के प्रतिबंध की खबरें तो आती हैं लेकिन फिर भी खुले बाजार में कहीं न कहीं प्लास्टिक मिल ही जाता है। सिंगल यूज प्लास्टिक को खत्म करने की मुहिम भी रंग नही लाई और प्लास्टिक की थैलियां खूब चलन में हैं।

एक ऑस्ट्रेलियाई अध्ययन के अनुसार, चीन प्लास्टिक कचरे का सबसे बड़ा उत्पादक है क्योंकि इसने वर्ष 2019 के दौरान प्रति व्यक्ति लगभग 18 किग्रा (40 पाउंड) प्लास्टिक कचरा उत्पन्न किया है।  पर्थ स्थित मिंडेरू फाउंडेशन के नेतृत्व में मंगलवार को प्रकाशित प्लास्टिक वेस्ट मेकर्स इंडेक्स में कहा गया है कि सिर्फ 20 कंपनियों ने सालाना फेंके जाने वाले दुनिया के सिंगल-यूज प्लास्टिक आइटम का आधा योगदान दिया है।  और उनमें से एक चौथाई मुख्य भूमि चीन में मुख्यालय वाली फर्में थीं।