बिहार के बक्सर जिले के चौसा प्रखंड के गंगा किनारे सोमवार को दर्जनों शव फूला हुआ और क्षय के विभिन्न चरणों में दिखाई दिया, उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में नदी तटों पर इसी तरह के दृश्य दिखाई दिए। ऐसी खबरे उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्यप्रदेश से सामने आ रही हैं। श्मशान घाटों पर जगह की कमी या कोरोना के भय से अंतिम संस्कार में होने वाले विलम्भ से बचने के लिए लोग बड़ी संख्या में शव गंगा और स्थानीय नदियों में प्रवाहित कर रहे हैं। ऐसा करने से उन्होंने शव तो बहा दिया लेकिन उनकी इस हरकत की वजह से वायरस तमाम उन पशु पक्षियों तक में चला जाएगा जो नदी या गंगा के जल का सेवन कर रहे हैं। इसमें केवल जानवर नही हैं, लाखों लोगों को जल की आपूर्ति में भी गंगा का अहम योगदान है, ऐसे में लोगों का यह असहज व्यवहार अमानवीय नजर आता है।

शवों पर कोविड के उन मरीजों के होने का संदेह है जिन्हें भारत में कोविड आपातकाल में नदी में फेंक दिया गया था। गाजीपुर के जिलाधिकारी एमपी सिंह ने कहा कि शव कहां से आए हैं, इसका पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। गाजीपुर के डीएम एमपी सिंह ने कहा, हमें जानकारी मिली, हमारे अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और एक जांच चल रही है।

यह एक जन जीवन विरोधी गतिविधि है। ऐसे लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए। घाटों पर अगर जगह नही है तो शवों को दफनाया जा सकता था, इससे संक्रमण के फैलने की आशंकाओं पर अंकुश लगाया जा सकता था। अभी वायरस मानव जाति तक है फिर भी इसकी रोकथाम के लिए किये जाने वाले प्रयास नाकाफी हो रहे हैं, सोचिए अगर यही वायरस आपके पशुओं तक में प्रवेश कर जाए तब क्या स्थिति होगी ? महामारी के इस दौर में कई तरह के प्राणी विरोधी कारनामों ने मानव जाति को शर्मसार कर दिया है।