इस साल का यह दूसरा भूकंप हैं। इससे पहले उत्‍तराखंड में 12 फरवरी की रात को भूकंप के झटकों ने उत्तराखंड की धरती को हिला दिया था। प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए थे। लेकिन फरवरी माह में आये भूकम्प का केंद्र ताजिकिस्तान था और भूकंप की तीव्रता 6.3 आंकी गई थी। राजधानी में झटका बहुत कम था जिस वजह से लोगों को यह महसूस भी नही हुआ कि भूकम्प आया था। भूकम्प टैकटोनिक प्लेट्स में विस्थापन की वजह से होता है। पृथ्वी चार परतों से बनी हुई है। इसमें इनर कोर, आउटर कोर, मैनटल और क्रस्ट शामिल है। क्रस्ट और ऊपरी मैंटल को लिथोस्फेयर कहते हैं। लिथोस्फेयर 50 किमी की मोटी परत है और इसे ही टैकटोनिक प्लेट कहते हैं।

कल (रविवार) रात लगभग 12:30 पर एक बार फिर उत्तराखंड की धरती में कुछ हलचल हुई। लोग घबराहट से अपने घरों से बाहर निकल आए। हालांकि भूकम्प ज्यादा देर का नही था लेकिन केंद्र चमोली होने की वजह से चमोली गढ़वाल में यह झटका काफी तेज था। मौसम विज्ञान केंद्र ने भी  भूकंप की पुष्टि करते हुए बताया कि इसका केंद्र चमोली  जिले में रहा। रेक्‍टर पैमाने पर इसकी तीव्रता करीब 4.3 दर्ज की गई। हरिद्वार, टिहरी  और ऋषिकेश में इसके झटके महसूस किए गए।