कुछ ही देर पहले महिला ग्राम प्रधान से अपने जर्जर मकान की मरम्मत कराने की मांग कर रही थी। इस घटना से महज आधे घण्टे पहले भी वह प्रधान से मकान की मरम्मत न होने तक अन्यत्र रहने की व्यवस्था का कह के आई थी, लेकिन इस बीच यह हादसा हो गया। प्रधान अंकित कुमार ने बताया कि शनिवार अपराह्न करीब ढाई बजे जब वह गांव में सैनिटाइजेशन व मास्क वितरण का कार्य कर रहे थे, तब रोशनी देवी के घर भी गए थे। रोशनी देवी ने अपने जर्जर भवन को दिखाते हुए मरम्मत का अनुरोध किया था, जिस पर उन्होंने उन्हें दूसरे मकान में रहने को कहा। इस दौरान ग्राम प्रधान ने राजस्व विभाग को दिखाने के लिए प्रमाण के तौर पर रोशनी देवी के मकान की फोटो भी ली थी। फोटो लेकर वह घर ही पहुंचे थे कि उन्हें सूचना मिली की मकान ढह गया है। 

शर्मनाक बात तो ये है कि बगल में ही बुजुर्ग का बेटा अपनी पत्नी व बच्चों के साथ रहता है लेकिन उसने कभी उस माँ के लिए इतना प्रयास करना भी उचित नही समझा जिसने उसको नौ माह तक कोख में रखा और कई वर्षों तक पाल के बड़ा किया।क्या यहां इंसानियत की बात नही होनी चाहिए ? दूसरे समाज पर हम अक्सर आसानी से कीचड़ उछाल देते हैं लेकिन अपने समाज में जो गलत हो रहा है उसे चुपचाप सुनते और देखते हैं। इस घटना का असल गुनहगार तो वही बेटा है जो माता-पिता द्वारा प्राप्त जमीन का उपयोग तो कर रहा है लेकिन उनका सहारा बनने को तैयार नही। क्या ऐसे व्यक्ति के ऊपर मुकदमा नही होना चाहिए ? पत्नी के आगे जिसको माँ का मोल नही पता तो ऐसे व्यक्ति को भौतिक सुखों के चलते विवाह से पहले ही माता पिता से स्पष्ट कर देना चाहिए कि वह उनकी सम्पति का उपयोग नही करेंगे, ऐसा एक नियम माननीय कोर्ट को बनाना चाहिए।

इस घटना के चश्मदीद ग्रामीणों ने बताया कि महिला घटना के वक्त घर के अंदर ही थी और वह मलबे में दब गई। कोतवाल रविंद्र यादव ने बताया कि मलबे से बाहर निकालने तक महिला दम तोड़ चुकी थी। सरकार को इस परिस्थिति में किसी भी प्रकार का मुआवजा नही देना चाहिए क्योंकि जिस बेटे ने जीते जी माँ की कद्र न जानी उसको सरकार मुआवजा दे तो यह ऐसे लोगों को बढ़ावा देने जैसा होगा जो इंसानियत से हटकर इस सामज में कार्य कर रहे हैं।