मोदी बनाम ममता में ममता ने मोदी को चारे खानों चित्त कर दिया। भाजपा ने इस चुनाव के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी बाबजूद भाजपा 100 का आंकड़ा भी नही छूँ पाई है। जैसा की हाल में द ऑस्ट्रेलिया अखबार ने मोदी सरकार को अहंकारी बताया था, ऐसा ही उस वक्त देखने को मिला जब चुनाव नतीजा 113/110 पहुंचा, न्यूज 24 पर भाजपा से उपस्थित वक्ता ने यहां तक कह दिया कि जीत तो भाजपा की हो ही रही है और इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस के कई अन्य नेता भी उनसे सम्पर्क बना रहें है। नेशनल टीवी पर इतनी बड़ी बात कहना ये भाजपा का अहंकार साफ दर्शाता है। इसलिए इस हार को अहंकार की हार कहा जाय तो गलत नही होगा। देश के प्रधानमंत्री ने पहले देश को कोरोना में झोंक और बाद में पार्टी के अध्यक्ष कहते हैं कि भाजपा कार्यकर्ता जश्न न मानाएँ, शायद जेपी नड्डा जानते थे कि बंगाल में उनकी जीत नही हो रही है। वरना अगर सच में भाजपा इतनी संवेदनशील पार्टी होती तो बंगाल चुनाव के लिए बिहार और उत्तर प्रदेश से बंगाल रैली के लिए भीड़ एकत्रित नही करती। अन्जाम ये हुआ कि आज बंगाल में हर चार में से एक व्यक्ति कोरोना संक्रमित है। अब सरकार ममता की आ गई है इसलिए केंद्र से उसके फंड रोककर ममता सरकार को बदनाम किया जाएगा और कोरोना संक्रमण का ठीकरा भी ममता के सर पर फोड़ दिया जाएगा। भाजपा के समर्थक ये भी भूल जाएंगे कि मोदी कैसे अपनी रैलियों में लाखों की भीड़ जुटाते थे, जहां समाजिक दूरी का कोई पालन नही होता था।

खैर, पिछले तीन महीनों से चुनाव में व्यक्त मोदी भी ये जानते थे कि ममता दीदी उनकी जमानत जब्त कर लेगी इसलिए हमेशा कि तरह अपनी छवि को साफ करने का काम वह सुबह से ही कोरोना बैठक करके कर रहे थे। न्यूज 24 के पत्रकार ने हिम्मत जुटाकर भाजपा प्रवक्ता से पूछा कि आखिर चुनावी रैलियों में व्यस्त प्रधानमंत्री को आज अचानक कोरोना पर बैठक की चिंता कैसी ? जिसके जवाब में प्रवक्ता महिला ने तुरंत जीत पर जश्न न मनाने वाले जेपी नड्डा के बयान को आगे कर दिया। न्यूज 24 पर ही जब शहनवाज भाजपा की तरफ से आए तो पत्रकार के सवालों से बचते नजर आए। पत्रकार ने पूछा कि इतनी भारी इन्वेस्टमेंट के बाद भी आप बुरी तरह हार रहें ? तो शहनवाज का चेहरा देखने लायक था और वह केवल ममता ममता ही करते रह गये और थोड़ी देर में चैनल से चले भी गये। अब भाजपा हर कोशिश कर रही है कि मोदी की डूबती लोकप्रियता को बचाएं तो कैसे ? खुद मोदी भी पूरा जोर लगा रहें हैं लेकिन कोरोना की स्थिति से बाहर निकलने का मोदी के पास कोई प्लान नही है। विपक्षी दलों की सलाह लेना नही चाहते और अपनी सरकार में किसी के पास कोई नीति होती नही है। अब तक कांग्रेस की नीतियां लागू करके वाह वाही तो लूट ली लेकिन कोरोना पर कांग्रेस की सलाह उनको उचित नही लगती इसलिए डॉ मनमोहन सिंह के सुजावों का जवाब हर्षवर्धन देतें जबकि मात्र 10 माह के प्रधानमंत्री रहे देवेगौड़ा के सुझावों का जवाब खुद मोदी देते हैं। ये मोदी जी की समझदारी का परिचय नही तो और क्या है, उस प्रधानमंत्री को उन्होंने कोई अहमियत नही दी जिसने देश को डूबती हुई अर्थव्यवस्था से उभार और विकसित देश अर्थव्यवस्था को स्थिर करने का पाठ जिससे पढ़ते रहे।

माननीय मोदी जी ये भूल गये कि गरिमा प्रधानमंत्री की कुर्शी की है, पद की है। हर राज्य में चुनावी रैली का हिस्सा होना उनको प्रोटोकॉल का उल्लंघन नही लगता लेकिन जब कोई सीएम उनसे हुई अपनी बात सार्वजनिक करता है तो प्रोटोकॉल बीच में आ जाता है। इसको अहंकार नही कहेंगे तो क्या कहेंगे ? महानता बनने की चाह में आपने एक ऐसे प्रधानमंत्री का अपनाम कर दिया जिसने देश की 10 साल बागडोर थामी। कमी रही होंगी उनके कार्यकाल में ये हो सकता है लेकिन कार्यकाल तो बेदाग आपका भी नही और आपमें तो इतनी झमता भी नही कि अपने खिलाफ कुछ सुन सको, यूट्यूब पर आपका प्रोग्राम डिसलाइक होता है तो डिसलाइक छुपा लिए जाते हैं, कोई ट्विटर पर कुछ लिख दे तो हटा दिया जाता है। ऐसे में बंगाल चुनाव में ममता दीदी की जीत को अगर कोई अहंकार पर जीत कहे तो इसमें गलत क्या है ।