मोदी है तो मुमकिन है का नारा अब ऐसे लग रहा है जैसे "मोदी है तो नामुमकिन है"। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देश भर में कोविड-19 के कारण हालात और कोरोना वैक्सीनेशन की प्रगति की समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक की। प्रधानमंत्री ने वैक्सिनेशन में तेजी लाने को तो कहा लेकिन वैक्सिनेशन उपलब्धता को लेकर कुछ नही बोले। उन्होंने एक देश में वैक्सीन के अलग-अलग दामों को लेकर भी कुछ नही कहा। आखिर जब केंद्र को वैक्सीन 150 में मिल रही है तो वही खरीद के राज्यों से 150 प्रति डोज के पैसे लेकर राज्यों को वैक्सीन क्यों नही दे रहे ? शायद केंद्र सरकार और कुछ भाजपा शासित राज्यों को छोड़कर बाकी राज्य भारत में नही आते, ऐसा मोदी जी मानते हैं। सवाल ये था कि जब वैक्सीन है ही नही तो वैक्सिनेशन में तेजी कैसे लाए ? क्या पानी के टीके लगा दें ? ये बात मोदी जी जानते थे इसीलिए ध्यान भटकाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में टेस्टिंग तेज करने का मुद्दा उछाल दिया।

सोचिए क्या होगा अगर ग्रामीण क्षेत्रो में टेस्टिंग तेज होगी ? ज्यादा केस मिलेंगे, फिर ? ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की क्या स्थिति है, क्या ये नही जानते मोदी जी। बिहार और उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में कई रिपोर्ट्स आई है जहां समाजिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ताले लटके हुए हैं या जर जर स्थिति में बन्द पड़े हुए है। कहाँ लेकर जाएंगे आप ग्रामीण मरीज को अगर वह पॉजिटिव आ गया तो, शहर के हस्पतालों के हाल भारत तो छोड़िया दुनियां तक को पता चल चुके हैं। ऐसे में टेस्टिंग तेज कर देने से क्या होगा ?

इस बैठक में प्रधानमंत्री ने सिर्फ दो काम की बातें की। पहली कि जिन भी राज्यों में विण्टीलेटर स्टोर में पड़े हैं उनका तुरंत स्तेमाल किया जाए और दूसरी कि राज्य कोरोना के आंकड़ों का सही स्पष्टीकरण दें। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से शुक्रवार देर रात तक मिले आंकड़ों के मुताबिक बीते 24 घंटे में देश भर में 3,26,014 नए मामले मिले हैं, 3,52,850 मरीज ठीक हुए हैं और 3,876 और मरीजों की जान गई है। इसके साथ ही कुल संक्रमितों का आंकड़ा दो करोड़ 43 लाख 72 हजार को पार कर गया है। इनमें से दो करोड़ चार लाख 26 हजार से ज्यादा मरीज ठीक हो चुके हैं और 3,66,229 मरीजों की अब तक जान भी जा चुकी है। सक्रिय मामले 36,69,537 हो गए हैं।

भारत को वैक्सीन की जरूरत बहुत ज्यादा है लेकिन केंद्र से इस समय राज्यों को जो सहयोग मिलना चाहिए था शायद नही मिल रहा है। यही वजह है कि अब राज्य विदेशों से खुद ही वैक्सीन मंगवाने को बेबस नजर आ रहें है। स्वतंत्र भारत में मोदी ऐसे पहले प्रधानमंत्री हुए हैं जिनसे अधिकांश और खासकर गैर भाजपा शासित मुख्यमंत्री बैठक के दौरान बात ही नही करना चाहते हैं। वजह ? मोदी सिर्फ अपनी बात कहते हैं। राज्य किस स्थिति से जूझ रहे हैं, उनकी जरूरतें क्या हैं, इसके मोदी जी को कोई फर्क नही पड़ता। मोदी जी भारत के सभी राज्यों पर एक सा निर्णय थोप देते हैं जिसका अंजाम ये होता कि संसाधनों ले अभाव में राज्य काम ही नही कर पाते। जबकि कुछ राज्यों पर मोदी की अधिक कृपा के बाद भी राज्य पिछड़ते जा रहे हैं जिनमें पहले नम्बर पर उत्तराखंड और दूसरे पर हरियाणा है।