कोरोना महामारी के इस दौर में हल्द्वानी चोरगलिया गांव में रहने वाले बुजुर्ग दंपती ने गजब का हौसला दिखाया। 85 वर्षीय मोहिनी देवी कई बीमारियों से ग्रस्त है, फिर भी उन्होंने कोरोना का पटखनी दी और बीमारी से सुरक्षित बाहर निकल आई। मोहिनी देवी की कुछ समय पहले ही बाइपास सर्जरी हुई है। वह हाई ब्लड प्रेशर व मधुमेह की रोगी है। वहीं उनके 90 वर्षीय पति मोहन चंद्र ने भी कोरोना की जंग जीत ली है। इस दम्पति के संघर्ष व हौसले को सलाम है। उत्तराखंड के अधिकांश क्षेत्रों में अच्छे खानपान की वजह से लोग कोरोना को आसानी से मात दे रहें हैं। ऐसी कई घटनाएं हैं जिनमे कई बुजुर्ग कोरोना को मात देने में सक्षम रहे।

लेकिन इस महामारी में स्वजनों की चिंताएं तो बढ़ ही जाती हैं। ऐसा ही कुछ मोहिनी देवी के स्वजनों का भी कहना था। उन्होंने कहा कि जब मोहिनी देवी की तबियत बिगड़ने लगी तो उनको चिंता इसलिए ज्यादा होने लगी क्योंकि हाल ही में उनकी सर्जरी हुई थी। स्वजनों ने डाक्टर से संपर्क किया। अस्पताल में भर्ती किए जाने की चर्चा हुई, लेकिन मन की मजबूत शक्ति वाली महिला मोहिनी देवी ने अस्पताल में भर्ती होने से साफ इन्कार कर दिया। उनका कहना था कि मेरे लिए घर पर ही दवा का इंतजाम कर दो। मुझे अस्पताल जाना ही नहीं है। परिवार में मोहिनी देवी अकेली संक्रमित नहीं हुई। उनके 90 वर्षीय पति मोहन चंद्र भी संक्रमित हो गए। यहां तक परिवार के अन्य सभी सदस्यों की आरटीपीसीआर जांच कराई गई। सभी संक्रमित आ गए। इसके बाद भी परिवार ने हिम्मत नहीं हारी। हौसला बनाए रखा। एक-दूसरे की मदद से कोरोना की जंग लड़ने में जुट गए। अब 20 दिन से अधिक समय हो गया है। सभी स्वस्थ हो गए हैं। स्वजनों का कहना है कि एक-दूसरे का सहयोग करते रहे।

पहाड़ समीक्षा ने कुछ समय पहले कोरोना के उपचार में भावनात्मक उपचार से जुड़ा एक लेख प्रकाशित किया था। यह घटना उसी पर आधारित है कि कैसे पूरा परिवार एक दूसरे को ढांढस बढ़ाते हुए 20 दिनों में कोरोना संक्रमण से उभर गया। परिवार का कहना है कि उन्होंने ऐलोपैथिक दवाओं के साथ साथ घरेलू नुख्सों की भी मदद ली और सभी कोरोना को मात देने में सक्षम रहे। यह एक प्रेरणा की घटना है उन लोगों के लिए जो कोरोना रिपोर्ट नतीजा सकारात्मक आने पर घबरा रहे हैं और अपने स्वास्थ्य को पहले से बुरी स्थिति में पहुंचा रहे हैं।