पिछले माह से अब तक राज्य लगभग 4000 लोग कोविड के चलते अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए हैं। राज्य में इस समय 80 हजार के करीब सक्रिय मरीज हैं।  शहरों के बाद कोरोना अब गांवों में दहशत पैदा कर रहा है। इस कारण पंचायतीराज विभाग 21 अप्रैल से ग्राम पंचायतों में कोविड के मामलों की नियमित निगरानी कर रहा है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार तक प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में 15,981 एक्टिव मरीज थे। जिसमें से 14,851 होम आईसोलेशन में रह रहे हैं। जबकि 122 पंचायतों में बने क्वारंटीन सेंटर और 1008 को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती किया गया है। सरकारी आंकड़ों की माने तो प्रभावित पांच व्यक्तियों में हर पाँचवा व्यक्ति ग्रामीण क्षेत्रों से है, ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र भी ज्यादा सुक्षित नजर नही आ रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ अनूप नौटियाल के अनुसार 14 से 16 मई के बीच पौड़ी, पिथौरागढ़, टिहरी, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग जैसे मुख्य रूप से ग्रामीण आबादी वाले जिलों में संक्रमण दर 20 प्रतिशत से अधिक रही। चमोली में संक्रमण दर 19 प्रतिशत से अधिक रही। चमोली में अब तक 8558 लोग संक्रमित हुए। जिनमें से 5918 स्वस्थ हो चुके हैं। संक्रमित हुए लोगों में लगभग पांच हजार लोग ग्रामीण क्षेत्रों से हैं। इसके मुकाबले देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और यूएसनगर जैसे शहरी आबादी वाले जिलों में संक्रमण दर औसत 15 प्रतिशत से कम रही। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण की स्थिति का अंदाजा लगता है।  

सरकार कोरोना के बीच में ही विधनसभा की सीटों के बंटवारे पर केंद्रित हो चुकी है। इससे साफ है कि सरकार लोगों के प्रति कितनी संवेदनशील है। केंद्र सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में टेस्टिंग बढाने की बात करती है लेकिन जो लोग सुरक्षित हैं और दुर्गम स्थानों पर हैं उनका टीकाकरण कैसे हो ? इस पर कोई बात नही करती, दूसरी तरफ राज्य सरकार भी इस ओर कोई ध्यान नही दे रही है। पहाड़ो पर अभी भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां वैक्सीन की पहली खुराक 45+ को भी नही मिली, ऐसे में कैसे सुनिश्चित हो की राज्य कोरोना से जंग जीत लेगा। कहीं ऐसा न कि 2022 के चुनाव के चक्कर में राज्य लाशों की गिनती ही करता रह जाए।