सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने शनिवार को एक बार फिर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की है।  दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 26 पैसे बढ़कर 93.94 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 28 पैसे बढ़कर 84.89 रुपये प्रति लीटर हो गई है।  आर्थिक राजधानी में यह पहली बार होगा जब पेट्रोल ने 100 रुपये का आंकड़ा पार किया।  मुंबई में आज पेट्रोल की कीमत 100.19 रुपये प्रति लीटर है जबकि डीजल की कीमत 92.17 रुपये है।  कोलकाता में पेट्रोल और डीजल की कीमत प्रति लीटर 93.97 रुपये और 87.74 रुपये और चेन्नई में क्रमश: 95.51 रुपये और 89.65 रुपये है।

हर प्रकार से महंगाई की मार झेल रहे समाज के लिए यह खबर किसी झटके से कम नही है। हाल ही में खाने के तेल यानी सरसों आदि का दम सरकार ने कई गुना बढाकर 175 रुपये प्रति लीटर के पार कर दिया था। मोदी सरकार पिछले 70 साल-70 साल करते करते सभी रिकॉर्ड तोड़ गई है। खाने का तेल पिछले 65 वर्षों में 70 से 75 रुपया प्रति लीटर तक ही पहुंचा था लेकिन मोदी सरकार में यह महज 07 सालों में लगभग ढाई गुनी रफ्तार से बढ़ गया। 75 रुपये प्रति लीटर बिकने वाला सरसों का तेल सीधे 175 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया बाबजूद की इसमें पाम आयल मिलाकर बेचा जा रहा है।

महंगाई से जनता में हाहाकार है लेकिन सरकार को इससे कोई फर्क नही पड़ता। देहरादून में शब्जी के करोबार करने वाले एक युवक से जब पहाड़ समीक्षा ने बात की तो युवक ने कहा कि महंगाई की मार आम रेडी लगाने वाले पर भी पड़ी है। ग्राहक नही होने की वजह से कई बार शब्जी रेडी पर ही खराब हो जाती है। आज लोग पाव के हिसाब से शब्जी खरीद रहे हैं जबकि आज से छह सात साल पहले लोग एक किलो से कम की खरीददारी उस समय में भी नही करते थे जब शब्जियाँ अपने उच्चतम स्तर पर होती थी। बातचीत के दौरान उसने बताया कि ट्रांसपोर्ट का खर्चा बढ़ने से सब्जियों की कीमत पर भी असर पड़ा है जिसकी मार आम जनता की जेब पर पड़ रही है।