आज एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान मेडिक्स को संबोधित करते हुए पीएम मोदी रो पड़े। कभी कभी तो ऐसे लगता है कि मोदी उस बच्चे की तरह हैं जो गलती के बाद मार पड़ने के डर से पहले ही रोना शुरू कर देता है। लेकिन मोदी अपने आंसुओं को भावनात्मक ढंग से उपयोग में लाते हैं। आज भी उन्होंने यही करने की कोशिश की लेकिन ट्विटर पर निशाने पर आ गये। लोगों ने कहा अब रोकर क्या होगा जब समय था तब कुछ किया नही, वगेरा वगेरा ...



महंगाई आसमान छूँ रही है और देश का प्रधानमंत्री कैमरे पर आंसू बहा रहा है- कुछ लोगों ने लिखा। कुछ ले लिखा कि कैमरे के सामने आंसू कैसे बहाते है, मोदी जी से सीखें। सारे मामले पर पीएम मोदी की तरफ से ट्विटर पर कोई प्रतिक्रिया भी सामने नही आई। तो अब लोग कह रहे हैं कि इस बार आंसू भी काम न आए। बीच-बीच में जनक बचाव करते हुए कुछ समर्थक भी ट्वीट करते नजर आए लेकिन ज्यादातर ट्वीट मोदी जी के विरोध में ही नजर आए। 



दरअसल, जनता कब तक झूठे वादों पर भरोसा करे। खाने का तेल 200 प्रति लीटर पहुंच गया है। क्या आम जनता ने ऐसी कल्पना की थी ? 35 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल का प्रचार करने वाला रामदेव आटे से बने रस ही 30 रुपया प्रति पैकेट बेच रहा है। क्या ऐसे चलेगा देश ? देश का मीडिया भ्रष्ट किया, न्याय सिस्टम प्रभावित किया, देश के सरकारी संस्थानों को सुधारने के बजाय बेच दिया। क्या ऐसे चलेगा देश ? अम्बानी अगर इतना ही देश हिती है तो पेट्रोल पर बढ़े दामों का विरोध क्यों नही करता ? पेट्रोल पंप तो उनके भी चल रहे हैं। नाम चमकाने के लिए साऊदी से आये ऑक्सिजन पे रिलायंस का नाम चिपकाने का काम तो देश में कोई भी कर सकता है। फिर इन्होंने क्या खास किया ? 



मौकापरस्ती ने आपसे जो भी करवाया हो उससे जनता को कोई फर्क नही पड़ता लेकिन जनता के हित में अगर काम नही होंगे तो कैमरे पर आँसू बहाने से कुछ नही होगा। आपने तो देश में केंद्र के लिए अलग संविधान और राज्य के लिए अलग संविधान का मानक खुद से ही तय कर लिया है। आप करें तो सही कोई और करे तो प्रोटोकॉल। जो व्यक्ति सादना में भी कैमरा लेकर बैठता हो उससे बड़ा नौटंकी कौन हो सकता है, ये बात उन लोगों को समझ आ चुकी थी जिनमे अपने दिमाग को 5% भी उपयोग करने की क्षमता है। बाकी ताली थाली बजाने वालों की देश में कमी नही है, आपके कैमरे पर बहते आंसुओं को देखकर दो चार तो अपने घरों में भी रोए होंगे।