राम रतन काला कुछ समय पहले कोरोना से संक्रमित हुए थे। संक्रमण के बाद उनकी तबियत में लगातार गिरावट की वजह से हस्पताल भी ले जाया गया लेकिन उनकी जान नही बचाई जा सकी। राम रतन काल कोटद्वार में थे और वहीं पर वृहस्पतिवार को उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। राम रतन काला आकाशवाणी और दूरदर्शन जैसे माध्यमों पर अपनी सक्रिय भागीदारी के लिए पूरे उत्तराखंड में प्रसिद्ध थे। इसके बाद उन्होंने अनेक गढ़वाली गीतों में भी बतौर कलाकार अभिनय किया। "तेरु मौछोया गाड़ बगिगे" जैसे गीतों में अभिनय कर उन्होंने बेसुमार ख्याति प्राप्त की।

उनके निधन पर गढ़ रत्न श्री नरेंद्र सिंह नेगी समेत तमाम गढ़वाली व कुमाऊनी गायकों व कलाकरों ने शोक व्यक्त किया। राम रतन काला उत्तराखंड की कॉमेडी फिल्मों में भी दर्शकों को खूब पसन्द आते थे। उनका एक अलग ही अंदाज दर्शकों को खूब लुभाता था। अपने जीवन काल में उन्होंने गढ़वाली बोली और उत्तराखंड संस्कृति के लिए बढ़चढ़ के काम किया। बौतर कलाकार भी वह पर्दे पर अपनी संस्कृति और भाषा की अलग जगाते ही नजर आते रहते थे।

उत्तराखंड के लोग उनको याद करते हुए फेसबुक और तमाम सोशल मीडिया के माध्यमों से याद कर रहे हैं। और करें भी क्यों नही ? उनका अभिनय वर्षों तक लोगों के दिलों में अपनी एक खास पहचान बनाने में कामयाब रहा। कलाकार की कला ही उसको इस संसार में अमर कर देती है। आने वाली पीढियां भी जब उनका अभिनय पर्दे पर देखेंगी तो एक यह इच्छा जरूर जागेगी कि कौन है ये कलाकार ? जीवन के इस अंनत सफर पर ईश्वर उनको अपने पावन श्रीचरणों में जगह दे, ॐ शांति ।