राष्ट्रीय समाचार: रामदेव ने एक योग सीवर के दौरान ऐलोपैथिक डॉक्टरों पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत में 01 हजार डॉक्टर कोरोना की डबल डोज के बाद भी मर गये, तो कैसी डॉक्टरी जो खुद को ही नही बचा पाए। हालांकि इस महामारी में सबको पता है कि बिना दवा के कोई इलाज सम्भव नही है, ऐसे में रामदेव का निशाना कोरोना वैक्सीन पर ही था इसलिए उन्होंने डबल डोज शब्द का इतेमाल करके 01 हजार डॉक्टरों का मजाक बनाया। सवाल ये नही है कि रामदेव किस पर निशाना साध रहा है लेकिन अगर रामदेव खुलकर वैक्सीन को फर्जी बता रहा है तो मोदी सरकार चुपचाप क्यों है?

क्या वास्तव में मोदी फर्जी टीकाकरण कर वाह वाही लूट रहे हैं? और अगर ऐसा नही है तो सरकार रामदेव पर खामोश क्यों है। रामदेव के अनुसार तो कोरोना वैक्सीन बिल्कुल फर्जी दवाई है और लोग फालतू में इसके पीछे अपना समय खराब कर रहें हैं। जिन डॉक्टर को कोरोना वारियर्स की उपाधि देश का प्रधानमंत्री देता है, देश का एक अन्य नागरिक जो कि प्रधानमंत्री की शरण में ही पनाह लिए हुए है, देश के 01 हजार डॉक्टरों की मृत्यु पर हंसी उड़ाता है। क्या आपको यह थोड़ा अजीब नही लगता है ?

देश में हर रोज सैकड़ों लोग कोरोना से दम तोड़ रहें और रामदेव कहते हैं कि उन्होंने आधी आवादी को कोरोना से बचाया है। सवाल ये है कि आपने उनको क्यों नही बचाया जो मर रहें है। आधी आवादी तो अपनी प्रतिरोधक क्षमता की वजह से वैसे ही सुरक्षित है। सवाल तो उनके लिए है जिनको कोरोना हो गया और उनकी स्थिति असामान्य हो रही है। रामदेव के अनुसार अगर कोरोना वैक्सीन कोई काम नही कर रही है तो फिर मोदी देश का पैसा और लोगों का कारोबार क्यों चौपट करने पर लगे हुए हैं।

हैरानी इसलिए भी है कि देश में डॉक्टर बनाने के लिए हर साल करोड़ो रुपया लगाया जाता है या रामदेव की भाषा में कहें तो खराब किया जाता है। तो क्या सरकार को ऐम्स जैसे संस्थान बन्द कर देने चाहिए ? भारत में तो रामदेव हैं इसलिए आधी आवादी सुरक्षित है। उन देशों में कौन सा रामदेव था जो वेक्सिनेशन के बाद उभर गये हैं या धीरे धीरे उभर रहे हैं? लेकिन क्योंकि अभी मोदी रामदेव के पक्षधर हैं इसलिए रामदेव की बकवास को सुनना जनता की मजबूरी है।