उत्तराखंड समाचार:एक तरफ मोदी सरकार देश को ये भरोसा दिला रही है कि सभी लोग अपनी बारी पर वैक्सीन लगाए, तो दूसरी तरफ मोदी सरकार के चहेते रामदेव कह रहें है कि मुझे वैक्सीन की जरूरत नही है। यह बात उन्होंने अमर उजाला को दिए एक साक्षात्कार में कही। यही बात जब देश में विपक्षी दल कह रहे थे तब संबित पात्रा एंड टीम उनका मजाक बना रही थी लेकिन अब रामदेव खुलकर उस टीके को फर्जी बता रहा है और एलोपैथी दवाओं की धज्जियां उड़ा रहा है तो मोदी कुनबा चुपचाप है। दरअसल, रामदेव को दिक्कत इस बात से है कि उनकी बनाई कोरोनिल को बाजार में क्यों नही उतरने दिया गया। अगर उतार देते तो अब तक वह भी करोड़ो छाप लेते और शायद दूसरी लहर में आटे की तरह दाम बढाकर दोगुनी कमाई भी कर लेता।

सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या रामदेव को सिर्फ निजी हित के लिए ही प्रश्न खड़े करने का अधिकार है। जिस भाजपा की गोद में बैठकर रामदेव इतना फुदक रहा है क्या उस सरकार से महंगाई पर कोई सवाल क्यों नही। एलोपैथी दवा कारोबार 200 लाख करोड़ का तो दिख रहा लेकिन जो पेट्रोल-डीजल के दाम से सरकार ने निजी लोगों का कई लाख करोड़ अंदर किया। और सिर्फ सरकार ही क्यों, जो पतंजलि ने खाने के तेल को महंगा करके करोड़ो रुपया कमाया, उसका क्या ? क्या तेल जनहित की सामग्री नही है।

गूंगे और बहरे इस देश में अंधे और अनपढ़ जो कह रहे है सब वही राग अलाप रहे हैं। रामदेव को दिक्कत सिर्फ एलोपैथ की कमाई से क्यों है जबकि वह कह रहे हैं कि एलोपैथी ने पोलियो और टीबी का इलाज ढूंढा, उसका स्वागत किया है। आकस्मिक चिकित्सा के क्षेत्र में एलोपैथी ने ऊंचा मुकाम हासिल किया है। तो फिर बहस तो केवल इस पर होनी चाहिए कि दवाओं के सही मानक तय हों, लेकिन रामदेव इस पर कभी नही बोलेंगे क्योंकि जो आदमी ₹35/- प्रति लीटर पेट्रोल पर खामोश है, जो आदमी खाने के तेल के  ₹75/- प्रति लीटर से ₹175/- लीटर पहुंचने पर चुप है, वह कभी मानक मूल्य की बात नही करेगा। रामदेव को ऐलोपैथिक से एलर्जी सिर्फ इसलिए हुई क्योंकि कोरोनिल को बाजार नही मिला और और उनकी कमाई नही हो पाई।

यहाँ एक और तथ्य यह भी प्रकाश में आया कि रामदेव के लगातार विवादित बयानबाजी के बाद भी मोदी और उनके मंत्री चुप हैं। रामदेव का कहना है कि योग खुद में डबल-डोज है तो फिर प्रधानमंत्री तो हर रोज वर्षों से योग करते हैं, जैसा कि वह स्वयं बताते हैं फिर उनको क्या आवश्यकता थी वैक्सीनशन की ? या फिर प्रधानमंत्री भी झूठ बोलते हैं और सिर्फ कैमरे के सामने ढोंग करते हैं। भारत की जनता जब तक इस एजेंडा को समझ पाएगी तब तक रामदेव और केंद्र सरकार दोनों का मकसद पूरा हो चुका होगा।  यह मुद्दा भी मैगी की तरह से दोबारा बाजार में सुचारू रूप से चल पड़ेगा।