रामदेव के नाम के आगे कुछ लोगों ने योग गुरू क्या लगा दिया वह समझने लगा है कि इससे पूर्व भारत में यौगिक संस्कृति थी ही नही। तथाकथित कुछ लोगों या यूं कहो कि कुछ अज्ञानी लोगों जिनको भारतीय संस्कृति व आध्यात्म विज्ञान का ज्ञान नही था उन्होंने रामदेव को रातों रात हिरो बना दिया। आज रामदेव खुद को इतना बड़ा समझ बैठा हैं कि कभी कारण बताओं नोटिश को प्रेम पत्र की संज्ञा दे देता  है तो कभी ऐलोपैथिक संस्थान को ही बिना इज्जत वाला कह देता है। साफ है, कि यह काम सिर्फ इसलिए हो रहा है क्योंकि सत्ताधारी केंद्रीय पार्टी रामदेव के पाले में है। वरना दुनिया जानती है कि बालकृष्ण जब मर्णोधार हो गये थे उनको ऐलोपैथिक दवाओं से ही ठीक किया गया। आयुर्वेदिक का अपना इतिहास और महत्व है लेकिन इसका यह मतलब नही है कि ऐलोपैथ का कोई इतिहास और उपयोग नही है।

आपको बता दें कि रामदेव के एक विवादित वीडियो बयान के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने उनका विरोध किया लेकिन उसके बाद उन्होंने ऐलोपैथिक पद्धति पर 25 सवाल खड़े कर दिए जिसके बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने उन पर एक हजार करोड़ का मानहानि दावा ठोक दिया। उनके इस बयान के बाद उनकी दुनियाभर में निंदा हो रही है, लेकिन रामदेव है कि मानने को तैयार नही। रामदेव ने कहा कि इस वक्त देश में धार्मिक, वैचारिक और सांस्कृतिक आतंकवाद तेजी से फैल रहा है। इसी में एक नए किस्म का आतंकवाद ट्रीटमेंट आतंकवाद भी पैदा हो गया है। कहा कि उनकी लड़ाई इनके खिलाफ हैं। एलोपैथिक का यह कारोबार करीब दो लाख करोड़ का है, वह इसके खिलाफ लड़ रहे हैं। 

अब सवाल यह है कि रामदेव हर बार झूठ बोलकर कब तक अपना कारोबार बढ़ाएगा। पहले भी कई बार उसने कहा कि कोलगेट बेकार है, तेल बेकार, आटा बेकार, घी बेकार है, शहद बेकार है। लेकिन जब कतर जैसे देश ने बाबा के प्रोडक्ट्स की जांच की तो सभी मिलावटी मिला और कतर में रामदेव के सभी उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। क्यों जनता को गुमराह कर रामदेव अपना करोबार बढ़ा रहा है ? क्या पतंजलि का करोबार करोड़ो तक नही पहुंचा ? हाँ, यह ठीक है कि ऐलोपैथिक इलाज सस्ता होना चाहिए लेकिन ऐलोपैथ इलाज की बेकार पद्धति है यह बिल्कुल निराधार तथ्य है। 
रामदेव का घी, शहद जैसा उत्पाद मिलावटी है तो क्या लोग उस पर छपा मूल्य नही चुका रहें है ? रामदेव ने पहले कहा कि मार्केट में सभी दंतमहजन मिलावटी हैं और अब खुद का दन्तकान्ति डाबर बना रहा है तो वह सही हो गया ? लेकिन जो आदमी उत्तराखंड सरकार के कारण बताओं नोटिश को प्रेम पत्र की संज्ञा दे सकता है, तो मतलब साफ है कि रामदेव को किसी का साथ तो जरूर मिल रहा है। एक तरफ मोदी सरकार भारत में ऐलोपैथिक टीकाकरण करवा के वाह वाही लूट रही है तो दूसरी तरफ रामदेव उसी टीके का मजाक उड़ाते हुए कह रहा है कि जो टीका डॉक्टरों को ही नही बचा पाया वो आपको क्या बचाएगा, और मोदी सरकार चुपचाप तमाशा देख रही है। 

आपको ध्यान होगा कि रामदेव वही आदमी है जो पेट्रोल, डीजल को ₹ 35/- प्रति लीटर की बात रजत शर्मा के शो आपकी अदालत के माध्यम से जनता को बताता था। लेकन आज अगर इस विषय पर उससे बात कर लो तो बात को कहीं से कहीं घुमा देता है लेकिन जवाब नही देता। उसको आज ऐलोपैथ पद्धति से लड़ने की याद तो आ गई लेकिन उस सरकार से लड़ने की याद नही आई जिसने उसको ₹35/- प्रति लीटर डीजल-पेट्रोल का सपना दिखाया था सिर्फ इसलिए की वोट लेना था। जानते हैं रामदेव ऐसा क्यों नही कर रहा ? क्योंकि रामदेव के पास कच्चे तेल के कुएं नही है। लेकिन आयुर्वेद का बिजनिस करने के लिए लाइसेंस है इसलिए किसी भी तरह ऐलोपैथिक पद्धति को बदनाम करके अपना कारोबार बढाना है। ठीक जैसे मैगी को बदनाम करके अपना आटा नूडल्स निकाला था। हालांकि जनता को नही पता कि रामदेव  के 99.99% उत्पाद मिलावटी हैं, ये दावा कतर जैसा देश पहले ही कर चुका है।