उत्तराखंड समाचार: रामदेव ने पहले बड़ी बड़ी डिंग हाँकि लेकिन जब सब जगह थू थू होने लगी तो अब अपने बयान से पलटी मार दी, ठीक वैसे ही जैसे पहले जनाना वस्त्रों को पहनकर भाग गए थे। दरअसल, रामदेव को समस्या इस बात से थी कि कोरोनिल को बाजार में क्यों नही उतरने दिया गया। कोरोनिल पर रिसर्च और बनाने में जो व्यय हुआ जब वह वसूल नही हुआ और रामदेव कमाई नही कर पाया तो तिलमिला गया और फिर बेबुनियादी बयानबाजी करने लगा। हाँ, आयुर्वेद आपने आप में एक समर्थ पद्धति है लेकिन एलोपैथ को बिल्कुल शून्य आंककर हमारे डॉक्टरों की बेजती करना, अशोभनीय बयान था। खैर, चार दिन में बाबा से लाला बने रामदेव को यह तो पता चल ही गया कि पतंजलि की हैसियत कितनी है।

अब रामदेव का कहना है कि एलोपैथी और एलोपैथिक चिकित्सकों का वह भरपूर सम्मान करते हैं और यही नहीं पतंजलि योगपीठ भविष्य में एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज का निर्माण करेगा और एलोपैथिक एमबीबीएस डॉक्टर बनाएगा। पहले डॉक्टर को टर-टर कहकर उपहास करने और खुद की जान को न बचा पाने वाली डॉक्टरी को किसी काम का न बताकर अब रामदेव भी डॉक्टर बनाएंगे। इसलिए नही कि देश हित का ख्याल आया है बल्कि इसलिए कि अब अगर कहीं एडमिट होना पड़ गया तो जिनकी बेजती की है वे जीवित छोड़ेंगे या नही ? बस यही डर अब रामदेव से खुद के लिए डॉक्टर बनाएगा।

रामदेव अब अपने बेतुके बयान से पूरी तरह पलट गए हैं, वजह पतंजलि का उत्पाद बिक्री घट गया। एलोपैथी को ईसाई धर्म से जोड़ने के बाद रामदेव को लगने लगा है कि पतंजलि का नाम कुछ दिन में "पता नही चली" न हो जाए इसलिए समय रहते वक्त है कि यूटर्न ले लिया जाए। भारतीय संस्कृति बहुत महान है इसलिए महान लोग कह गये थे कि "क्वचिद कणामः भये सादू" अर्थात काणे भी कभी सादू हुए, काणे से यहां अर्थ है अकल का काणा। जिस व्यक्ति को सिर्फ आपना निजी लाभ ही समाज हित लगता हो ऐसी जड़ बुद्धि का व्यक्ति सादू बनने का ढोंग तो कर सकता है लेकिन हो नही सकता।

अब जब ऑल इंडिया मेडिकल असोसिएशन ने ये ऐलान कर दिया कि हमारी लड़ाई आयुर्वेद से नही बल्कि एक घमंडी लाला से है तो रामदेव ने माफी मांग ली है। अब दिमाग से 200 लाख करोड़ की गर्मी उतर गई है। क्योंकि पतंजलि को एक माह भी नही लगेगा जमीन में लाने में अगर मोदी सरकार ने हाथ पीछे खींच लिया। शायद यही एहसास लाला रामदेव को पलटी मारने पर मजबूर कर गया और अब न सिर्फ ऐलोपैथिक हस्पताल खोलेंगे बल्कि ऐलोपैथिक के साथ आयुर्वेद को मिलाकर एक नई पद्धति बनाएंगे और अपने अनुयायियों को बाबा का पेटेंट बेचकर 200 लाख करोड़ कमाएंगे।