शनिवार को सोशल मीडिया पर रामदेव का 2 मिनट 19 सेकंड का एक वीडियो तेजी।से वायरल होता रहा। इस वीडियो में रामदेव अपने समर्थकों के सामने अपने फोन पर मैसेज पढ़ते हुए दिख रहे हैं। जिसमें उनकी ओर से एलोपैथिक दवाओं पर कई गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि एलोपैथिक की सभी दवाइयां फेल हो गई हैं। बुखार की तक दवा काम नहीं कर रही है। दवा शरीर का तापमान तो नीचे उतार देती है, लेकिन बुखार क्यों आ रहा है, उसका निवारण नहीं है। यही नही रामदेव ने लगे हाथ ये भी कह दिया कि कोरोना में लाखों लोगों की मौत ऐलोपैथिक दवाओं के सेवन से ही हुई है।

बस फिर क्या था इसके बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने कड़ी आपत्ति जताई है। आईएमए ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन से रामदेव के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। आईएमए ने रामदेव के बयान पर उन्हें कानूनी नोटिस भेजा है। इसके बाद 35 रुपया प्रति लीटर पेट्रोल देने वाले लाला रामदेव तो सामने आए नही लेकिन पतंजलि के मंत्री बालकृष्ण लाला जी के बचाव में खड़े नजर आ रहे हैं। विरोध बढ़ता देख बालकृष्ण ने कहा कि  रामदेव सिर्फ एक व्हाट्सएप मैसेज पढ़ रहे थे। मॉर्डन साइंस और अच्छे डॉक्टरों के खिलाफ उनकी गलत मंशा नहीं थी। बाबा रामदेव मॉर्डन साइंस एक प्रोग्रेसिव साइंस पर विश्वास करते हैं। 

लेकिन बालकृष्ण ये भूल गये कि रामदेव ने दरअसल कहा क्या है। रामदेव ने वीडियो में  कहा कि "एलोपैथी एक ऐसी स्टूपिड और दिवालिया साइंस है। पहले मोरोक्वीन फेल हुई, फिर रेमडेसिविर फेल हो गई, फिर इनके एंटीबायोटिक्स फेल हो गए, फिर स्टरॉयड इनके फेल हो गए, प्लाज्मा थेरेपी के ऊपर भी बैन लग गया। फेबिफ्लू दे रहे थे, वो भी फेल हो गई। जितनी भी दवाइयां दे रहे हैं। सब एक-एक करके फेल होती जा रही हैं, ये तमाशा हो क्या रहा है?" अब लाला जी आप ही बता दो क्या खाएं ? आपका 375 रुपया का 10 किलो आटा या फिर आपका मिलावटी शहद या सिर्फ पतंजलि का मिलावटी समान खाने से ही शरीर स्वस्थ रहेगा।