ग्लोबल वार्मिंग के चलते सर्वाधिक नुकसान हिमालयी क्षेत्र झेल रहा है। उच्च क्षेत्र में पर्याप्त बर्फ न होने के कारण नदियों का स्तर भी लगातार गिरता जा रहा है। ऐसे  में अप्रैल माह में हुई बारिश और बर्फबारी दोनों ही राज्य के लिए बहुत जरूरी थी। इस बारिश ने प्राकृतिक रूप से सेनिटाइजर का काम भी किया है तो पर्यावरण में मौजूद कोरोना वायरस को खत्म करने में भी इस बरसात की अहम भूमिका है। अब अगर लोग सही से सतर्कता बरते तो पूरी उम्मीद है कोरोना से राहत मिलेगी।

देश के अंतिम गांव माणा से आगे सीमा क्षेत्र में सेना, आईटीबीपी और बीआरओ के जवानों के अलावा किसी को भी जाने की अनुमति नहीं है। माणा पास में भारतीय सेना की अंतिम सेना चौकी है। यहां सेना के जवान सीमा की चौकसी में मुस्तैद हैं। यहां सड़क पर करीब 30 फीट तक बर्फ जमी हुई है। कई जगहों पर हिमखंड टूटकर गिरे हुए हैं। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने चीन सीमा क्षेत्र में माणा पास तक सड़क खोलने का काम शुरू कर दिया है।

बता दें कि मौसम विज्ञान केंद्र ने मंगलवार को रेड अलर्ट जारी किया है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य के कुछ स्थानों में तेज गर्जना के साथ ही आकाशीय बिजली गिरने की पूरी संभावना है। हरिद्वार, देहरादून, ऊधमसिंहनगर जैसे मैदानी क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी। मैदानी क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश से स्थानीय प्रशासन भी अलर्ट पर है। लेकिन सर्वाधिक दिक्कत सीमा क्षेत्र में ही पेस आ रही है।