तकनीकी के इस दौर में जहां सूचना प्रणाली दुरुस्त हुई है वहीं इसके कई घातक परिणाम भी अब देखने को मिल रहे हैं। हमने विषयों का वर्गीकरण खो दिया है और निजित्व को बढ़ावा दे दिया है। इसी का एक उदाहरण आज के खबरी मीडिया भी बन गया है। दरअसल, अखबारों और समाचार चैनलों का जो कार्य है वह जनता के लिए सरकार से सवाल उठाना है या फिर जनता की समस्याओं का उनके हित में प्रकाशन करना है। लेकिन यही लोग अब खबरें कम और दूसरे लोगों के निजी जीवन प्रचार प्रसार में ज्यादा लगे हुए हैं। अगर कोई भी व्यक्ति कहीं घूमने जाता है तो यह उसकी अपनी इच्छा है लेकिन इसको तमाम इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया खबर बनाकर दिखा रहा है। जबकि जिस प्रधानमंत्री के विदेश दौरों पर चर्चा होनी चाहिए वह कहीं देखने को नही मिलता है।

इसी कड़ी में सोशल मीडिया भी इन्हीं खबरों के प्रचार प्रसार के लिए उपयोग में लाया जा रहा है। सोशल मीडिया तो आज ऐसे हो गया है कि लोग बिस्तर तक की तस्वीरें सार्वजनिक करने से पीछे नही हटते। भारत में इंटरनेट ने क्या कमाल किया है इस पर पहाड़ समीक्षा पहले ही एक लेख प्रकाशित कर चुका है। यह लेख पोर्न से सम्बंधित है और इसके आंकड़े बताते हैं कि भारत किस दिशा में बढ़ रहा है। जनहित का छोटा सा कार्य भी ऐसे दर्शाया जाता है कि मानो इन्होंने पृथ्वी दान कर ली हो, खासकर नेताओं के पक्ष में। जनता ने जिसको चुना उसका एक मात्र कर्म ही जनता के दुखों का निवारण है लेकिन आज स्थिति यह है कि घर का पुराना फ्रीज भी किसी कार्य के लिए दे दो तो बेबसी/बेचैनी इतनी बढ़ जाती है कि फेसबुक पर उसके बारे में लिखना पड़ता है।

यह केवल नेताओं तक सीमित होता तो शायद मनुष्य जाति के लिए इतना घातक नही होता लेकिन आम जनता भी यही करने लगी है। पहले ऐसा केवल शहरी क्षेत्रों में होता था क्योंकि शहरी लोगों में दिखावा ज्यादा होता है ऐसा माना जाता था। लेकिन अब यही स्थिति हर जगह है जहां लोग मास्क जैसी साधरण के वितरण पर भी खुद का प्रचार कर रहे हैं। क्या है जरूरी है कि हमें हर बात को फेसबुक के माध्यम से उन लोगों तक अपने किये गये कार्यों या खुशी-गम को बांटना चाहिए। किसी को क्या फर्क पड़ता है यदि आप किसी अपने परिजन की फ़ोटो के साथ उसकी मृत्यु का समाचार सांझा करते हैं। और मूर्खता तो लोग ऐसी खबरों पर लाइक के निशान लगा कर करते हैं।  मझेदार बात यह कि यही लाइक देखकर सामने पोस्ट करने वाला खुश भी हो जाता है कि लोगों ने उसकी पोस्ट को लाइक किया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि जिस व्यक्ति को कोई जनता ही नही या उसके साथ ज्यादा उठना बैठना था ही नही, उसके लिए सम्वेदनाएं नही होती हैं।

सोचिए आप कैमरा लेकर सादना में बैठ रहें हैं। तो मतलब साफ है कि आपको अध्यात्म में नही बल्कि दुनियां में दिखने का शौक है। ठीक यही हो रहा है, हम दूसरे की मदद इसलिए नही कर रहे कि हम में इंसानियत जिंदा है बल्कि इससे ज्यादा भाव इस ओर है कि इसका फायदा किस तरह से उठाया जाय। क्या नेता और क्या आम जनता, सब कहीं न कहीं फल की इच्छा के साथ ही ऐसा दिखावा कर रहे हैं। हम बौद्धिक स्तर पर पिछड़ रहे है और अपने उन गुणों को दूसरों को दिखा रहे हैं जो हम नही है लेकिन बनने की कोशिश कर रहें है। आप अपनी प्रोफाइल फोटो को बहुत एडिटिंग के साथ किसी न किसी मकसद से ही लगा रहें है जबकि आप वैसेहै नही। इसका मतलब साफ है आप तकनीकी का उपयोग नही बल्कि दुरुपयोग कर रहे हैं।