कोई भी राज्य अपने क्षेत्र में अगर कोई सुविधा विकसित करता है तो उस पर प्रदेश की जनता का हक पहले होता है। इस बात को ऐसे समझते हैं, मान लो प्रदेश में कोई ऐसा प्लांट लगा जिस से जहरीली गैसें निकल रही है तो सर्वाधिक प्रभावित कौन होगा ? प्रदेश का नागरिक ही न । तो अगर राज्य में ऑक्सिजन के तीन तीन प्लांट हैं तो सर्वाधिक ऑक्सिजन किसको मिलनी चाहिए ? लेकिन बदकिस्मती से उत्तराखंड को गलत हाथों में भेजने का खामियाजा आम जनता भोग रही है। यह केवल ऑक्सिजन की बात नही है, बल्कि तमाम वो संसाधन जिन पर राज्य के लोगों का पहला हक है, से जनता को वंचित किया जा रहा है। उत्तराखंड में बने बांध (डैम) ही ले लीजिए! उत्तराखंड में बिजली की दरों को देखकर लगता है कि उत्तराखंड में नेता जितने निक्कमे हैं पूरी धरती पर कहीं और नही हैं। राज्य के बांधो का पानी दूसरे राज्यों को दिया जा रहा है और प्रदेश में दर्जनों ऐसे गांव है जिनको पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। क्या यह प्रदेश के नेताओं की दिमागी अपंगता नही है ?

आप सोचिए राज्य को किस तरह से भाजपा राज में अपंग बना दिया गया है। राज्य में ऑक्सिजन के प्लांट होने पर भी लोग हस्पतालों में इस भय से व्याकुल हैं कि पता नही केंद्र सरकार समय पर ऑक्सिजन भेजेगी या नही ? कमाल है। एक तरफ देहरादून जैसे शहरों में सुप्रसिद्ध जगहों जैसे की सहस्त्रधारा की जमीनें अमित शाह को कौड़ियों में बेची जा रही है। हाईवे के आसपास की जमीन भी भाजपा के लोगों को ही दी जा रही है। तो राज्य का नागरिक कहाँ जाएगा ? क्या पहाड़ी क्षेत्र के नागरिक को हक नही कि वह देहरादून जैसे सुगम स्थानों पर आकर रहे ? लेकिन नही ! जिनको जमीन सही दामों पर मिलनी चाहिए उनको प्रदेश के दृष्टिहीन नेता नही देंगे, उनको देंगे जिनके तलवे चाटकर उनकी राजनीति चल सके।

बेशर्मी की हद हो गई है। जो मानसिक रूप से अपरिपक्व हो ऐसा व्यक्ति भी देश का स्वास्थ्य मंत्री हो सकता है, यह कारनामा केवल मोदी जी ही कर सकते थे। और मझा तो आपको पढ़कर आएगा कि ऐसे व्यक्ति के आगे भी जो झुका हुआ नजर आए, उसकी मानसिक स्थिति क्या होगी ? जी हां , मैं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री माननीय तीरथ सिंह रावत की बात कर रहा हूँ। महोदय राज्य में बन रही ऑक्सिजन के लिए ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के आगे गिड़गिड़ाते नजर आ रहे हैं और लोग बिना सुविधाओं के तड़पतड़प के दम तोड़ रहे हैं। एक तरफ मोदी जी की कठपुतलियां हैं और दूसरे तरफ झारखण्ड जैसे राज्यों के मुख्य मंत्री हेमंत सोरेन, जो मोदी पर ये आरोप लगा के ट्वीट कर देते हैं कि उन्होंने राज्य की स्थिति के बारे में कोई चर्चा नही की और केवल अपनी चलाई। समझ में ये नही आता कि भाजपा शासित प्रदेश केवल मोदी के कहने पर प्रदेश की जनता को क्यों गुमराह कर रहे हैं ? बहुत बारीकी से अध्ययन के बाद पता चला की भाजपा ने जिन भी लोगों को मुख्यमंत्री बनाया उनकी इतनी योग्यता नही कि वह बिना लहर के कहीं से चुनाव जीत सकें लेकिन सत्ता में रहना चाहते हैं इसलिए मोदी की हाँ में हाँ ही एक मात्र विकल्प है।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र भी बिना केंद्र की अनुमति के राज्य हित में एक फैसला नही ले सके और अब तीरथ सिंह रावत भी उसी राह पर आगे बढ़ रहे हैं। उपकार स्वरूप मिली मुख्यमंत्री की कुर्सी राज्य को अपंगता की ओर धकेल रही है। राज्य के अंसाधनों को केंद्र व उनके चहितों के हाथों बेच दिया गया है। एक ऐसा राज्य जिसको बहुत खूबसूरत बनाया जा सकता था, जो देश में अपनी ऐसी पहचान बना सकता थी कि विदेशों तक डंका बजता वह अपनी दुर्गति के साथ पहाड़ी राज्यों में नंबर 01 और देश के सर्वधिक बर्वाद राज्यों में टॉप 10 में आ गया है। नेताओं के पास यह सोचने का समय नही है क्योंकि उनकी प्रॉपर्टी देश व विदेश के कई हिस्सों में हैं,यही वजह है कि इन नेताओं के लिए पार्टी और राज्य कोई अहमियत नही रखते हैं। आज कांग्रेस कल भाजपा क्यों ? जनसेवा तो विपक्ष में रहकर भी हो सकती है बल्कि विपक्ष में रहकर ही जनसेवा सबसे अच्छी होती है। लेकिन नही, इनको सत्ता चाहिए क्योंकि कोरोड़ो रुपया जनता का डकारना है और बदले में इनके पास जनता चली जाए तो ऐसे चौड़े होकर साधारण काम करवाते हैं जैसे इन्होंने पता नही आपके लिए क्या कर दिया। जनता में अगर थोड़ा सा भी विवेक हो तो उन नेताओं को तो बिल्कुल भी वोट नही देना चाहिए जो जीत के बाद पार्टी बदल लेते हैं, जो क्षेत्र में किये कार्यों का क्रेडिट लेते है और जिनको मिलने के लिए समय लेना पड़े।