20 अप्रैल को प्रधानमंत्री ने लॉक डाउन का फैसला राज्य सरकारों पर छोड़ दिया था और साथ ही अपील की थी कि प्रवासियों में सरकार भरोसा जगाए। लेकिन 20 अप्रैल तक बहुत से राज्यों में स्थिति इतनी गम्भीर नही थी इसलिए अधिकांश राज्यों ने लॉक डाउन को अपना अंतिम निर्णय रखने का फैसला लिया, उत्तराखंड उन्हीं राज्यों में से एक है। हस्पतालों पर कोरोना की वजह से पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव अब हस्पताल उठा नही पा रहें हैं। ऐसे में ऐम्स के उच्च अधिकारी और स्वास्थ्य व्यवस्था में संलग्न अनेक विभागों ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि लॉकडाउन ही इस स्थिति से भारत को उभार सकता है। लेकिन देखा जाए तो समझदारी तो इसी में है कि राज्य अपनी स्थिति अनुसार लॉक डाउन लगाए जिससे राज्य की जनता को ज्यादा दिक्कतों का सामना न करना पड़े। राज्य केंद्र की तरफ देख रहें कि केंद्र लॉकडाउन की घोषणा करे और केंद्र पहले ही कह चुका है कि राज्यों को जरूरत है तो लॉक डाउन कर सकते हैं। विपक्ष भी लगातार यही मांग कर रहा है कि स्थिति पर काबू पाने के लिए और संक्रमण दर को कम करने के लिएलिए लॉक डाउन बेहद जरूरी है।

अब इसी दिशा में उत्तराखंड राज्य भी अपनी नीतियां तय करने जा रहा है। उत्तराखंड में हुई मंत्रिमंडल बैठक में अधिकांश मंत्रियों ने लॉक डाउन का समर्थन किया है। राज्य में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। अभी तक राज्य में इससे पहाड़ी क्षेत्र बचा हुआ है लेकिन अगर लॉक डाउन न लगाया गया तो स्थिति बेहद भयावाह हो सकती है। पहाड़ो पर स्वस्थ्य सेवाएं पहले ही दम तोड़ रही है, ऐसे में अगर इन क्षेत्रों में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ती है तो स्थिति बेहद खराब हो सकती है। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए आगामी सप्ताह से पूर्ण लॉक डाउन लग सकता है। आने वाले समय में अगर कोरोना की संक्रमण डर पर नियंत्रण देखने को न मिला तो केंद्र सरकार भी इस पर मोहर लगा सकती है।