उत्तराखंड में कोरोना का पहला मामला 15 मार्च 2020 को सामने आया था, जबकि पहली मौत एक मई को हुई। इसके बाद मौत का ग्राफ निरंतर बढ़ता गया। कोरोना मृत्यु दर राज्य के लिए लगातार चिंता का सबब बनी रही है। उत्तराखंड उन राज्यों में शुमार रहा, जहां मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से भी ज्यादा है। यहां सर्वाधिक मौत अक्टूबर माह में हुई। पिछले कुछ वक्त से जरूर सिस्टम सुकून में था, पर अब मौत का आंकड़ा फिर डराने लगा है। कोरोना के कारण जान गंवाने वालों की संख्या अब तेजी से बढ रही है। उत्तराखंड में कोरोना की स्थिति भयावह है। यहां न केवल संक्रमण अन्य कई राज्यों की तुलना में अधिक है, बल्कि अब मौत का आंकड़ा भी डरा रहा है। स्थिति ये है कि हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड मृत्यु दर में सबसे आगे है। वहीं में देश में राज्य 09 वें नंबर पर है।

कोरोना संक्रमण के मामलों को लेकर गठित विशेषज्ञ समिति तक कह चुकी है कि दूसरी लहर पहले की तुलना में कई ज्यादा घातक साबित हुई है। अब कम्यूनिटी फॉर सोशल डेवलपमेंट के आकलन से सामने आया है कि हिमालयी राज्यों में सबसे अधिक मृत्यु दर उत्तराखंड में है। उत्तराखंड में प्रति लाख मरने वालों की संख्या करीब 37 है। जबकि पडोसी राज्य उत्तर प्रदेश में यह मात्र आठ और हिमाचल में 28 है। नौ हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड पहले स्थान पर है, जहां मौतों का आंकड़ा सर्वाधिक है। उत्तराखंड में प्रति एक लाख पर 37 मौतें रोज हो रही हैं। जबकि हिमांचल, सिक्किम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड, अरुणाचल और मिजोरम में 28,28,18,11,8,7,4 और 2 क्रमशः प्रति एक लाख पर मृत्यु है। कोरोना पर गठित विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष अनूप नौटियाल के अनुसार, मृत्यु दर को कम करने के लिए प्रदेश सरकार को हर संभव कोशिश करनी चाहिए। लोग भी लापरवाही न करें। लक्षण मिलने पर वक्त पर जांच कराएं और समय पर उपचार शुरू करें।

उत्तराखंड की भाजपा सरकार सिर्फ केंद्र के इशारों पर चल रही है, ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य विवेकहीन नेताओं के हाथों में है। पिछले 04 वर्षों में राज्य इतना पिछड़ गया है कि आने वाले 10 सालों में अगर राज्य को अच्छा शासक भी मिले तो भी इसकी भरपाई करना इतना आसान नही होगा। राज्य में सत्ता परिवर्तन का होना बेहद जरूरी हो गया है अगर सरकार इन्हीं विवेकहीन लोगों के हाथों में रही तो दिन दूर नही जब लोग शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए असहाय नजर आएंगे। भाजपा से जुड़े लोग केवल बातों का क्रेडिट लेना जानते हैं, फिर वो चाहे केंद्र की सरकार हो या राज्यों की। नीति ले नाम पर इनके पास कुछ नही होता है, हाँ बातें जितनी मर्जी इनसे बनवा लो। हकीकत ये है कि उत्तराखंड इस वक्त अपनी लाचार स्थिति और दुर्दशा के साथ भारत के 28 राज्यों में 09वें नम्बर पर है।