राज्य में बड़े बड़े दावे करने वाली भाजपा सरकार जनता से किये वादों पर बैक फुट पर नजर आ रही है। दरअसल, बीते वर्ष 04 जून को बतौर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कोविड-19 की रोकथाम के संबंध में बैठक में कोरोना से मृत्यु पर 01 लाख मदद की घोषणा की थी। लेकिन अब उन्ही की सरकार में मुख्यमंत्री का चेहरा बदल गया तो उनकी घोषणा भी हवा हवाई हो गई है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में जब मृतकों की संख्या बढ़ी और मौजूदा सरकार को पुरानी घोषणा के बारे में बताया गया तो वह इससे अनजान नजर आ रही है। कमाल है, क्या नेता जी घोषणा उन्हीं की पार्टी के एक भी नेता के कानों में नही पड़ी थी क्या ? या अब इससे पल्ला झाड़ा जा रहा है।

बात सिर्फ इतनी ही होती तो कोई भूल भी जाता लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री ने जोश जोश में कोरोना योद्धाओं की मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को 10 लाख रुपये आर्थिक सहायता देने के संबंध में आदेश जारी किया, लेकिन कोरोना संक्रमितों के स्वजन को आर्थिक मदद देने की घोषणा को भी बड़े गोपनीय तरीकों से गायब कर दिया गया। 

अब या तो पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत को उनका मंत्रिमंडल ही माजक में लेता रहा है या फिर उनकी बातों का सरकार में कोई वजन नही था। फिर सवाल ये है कि, अब बाहर से त्रिवेंद्र सुशासन का राग क्यों अलाप रहे हैं। कभी कैबिनेट मंत्री जोशी को अनुभव का पाठ पढ़ा रहे हैं तो कभी कोरोना वायरस को ही जीव बता रहे हैं। खैर, विपक्ष को फिर से भाजपा को घेरने का मुद्दा मिल गया है। देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा अब कौनसा नया मंत्र फूंककर अपने समर्थकों को वश में करती है।