दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला समाने आया है। उत्तराखंड से दो गुनी जनसँख्या वाला राज्य दिल्ली आज एक ऐसी सरकार के हाथों में है जिस पर दिल्ली की जनता को नाज है। भारत में जहां चारों तरफ अन्य राज्य फंड की कमी को दर्शाते हैं और विकास कार्यों व जनहित में कोई अच्छा फैसला नही लेते वहीं दिल्ली की आम आदमी पार्टी ने यह बताया है कि भारत में भ्रष्टाचार की सीमा कितनी विशाल है। अरविंद केजरीवाल जनता कि हर समस्या तक पहुचने की कोशिश करते हैं और जनता से किया वादा पूरा करने के  पूरी ताकत झोंक देते हैं। केंद्र सरकार की केजरीवाल सरकार को बदनाम करने की कोशिश के बाद भी केजरीवाल ने जिस इंसानियत का परिचय दिया है, काबिल-ए-तारीफ है।  

आपको याद होगा कुछ दिन पहले बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद ने एक अपील की थी कि कोरोना काल में जिन बच्चों के माता पिता नही रहे सरकार उनकी मदद करे। इसी पर गम्भीरता से संज्ञान लेते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री ने एक बयान जारी कर कहा कि मैं जानता हूँ कोरोना में बहुत से बच्चे अनाथ हुए हैं। ऐसे बच्चों के साथ मेरी पूरी हमदर्दी है और मेरे रहते खुद को अनाथ न समझना। उन्होंने कहा, ऐसे बच्चों की शिक्षा पर कोई असर नही पड़ेगा उसका सारा खर्चा दिल्ली सरकार उठाएगी, साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर किसी के आस पास में ऐसे बच्चे या बूढ़े लोग हो जो अपनों को खो चुके हैं तो उनको देखरेख करें, कुछ समय तक उनका सहारा बने, उनको प्यार दें। केजरीवाल ने कहा, कि मैं जानता हूँ कई ऐसे घर भी जिनमें कमाने वाले ही इस महामारी में चले गए, ऐसे वृद्ध लोग निराश न हो, आपका ये बेटा अभी जिंदा है।

एक राजा का कर्तव्य क्या होता है ये बाकी के मुख्यमंत्रियों को अरविंद केजरीवाल से सीखने की जरूरत है। कई राज्यों कि जनसँख्या दिल्ली से कम है फिर भी हालात बहुत बुरे हैं। ऐसे राज्यों को उनसे सीखना चाहिए कि सरकार कैसे चलाई जाती है। अनाथ हुए बच्चों और बेसहारा बुजुर्गों का पूरा खर्चा उठाने का साहस रखना बहुत बड़ी बात है और उससे भी बड़ी बात है कि दुःख की इस घड़ी में ये दिलासा देना कि अभी मैं जिंदा हूँ, इसलिए घबराए नही। ऐसा मुख्यमंत्री पिछले 30 वर्षों में  मैंने नही देखा, हाँ व्यवस्थाओं को करने में दिक्कतें आ सकती हैं लेकिन इतना करने का अगर सोच लिया है तो ईश्वर उनकी मदद करेगा। उम्मीद है इस बात से उत्तराखंड जैसे महज 01 करोड़ आवादी वाले राज्य के मुख्यमंत्री कुछ सिख लेंगे।