उत्तराखंड समाचार: उत्तराखंड में लाखों युवा भगवान भरोसे बैठे हुए हैं क्योंकि जिनको चुनकर भेजा था उसको तो याद भी नही कि राज्य में पीसीएस नाम की भी कोई परीक्षा होती है। सरकार का पूरा कार्यकाल बीत गया लेकिन वर्ष 2016 के बाद पीसीएस के पदों पर किसी प्रकार की बहाली नही की गई है। वर्ष 2016 में हुई परीक्षा भी पूर्व सरकार कांग्रेस के कार्यकाल की निकाली हुई भर्ती थी। उसके बाद तो राज्य में सरकारी नौकरियों में जैसे ग्रहण ही लग गया है। हालत इतने खराब हैं कि पीसीएस पदों पर सरकार किसी प्रकार की विज्ञप्ति तक नही निकाल पाई है। 

अब युवाओं में इसे लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। युवाओं का कहना है कि जिस अभ्यार्थी ने 22 वर्ष की आयु में अपनी तैयारी शुरू की थी वह आज 27 वर्ष का हो चुका है लेकिन सरकार का इस ओर कोई ध्यान नही है। क्या सरकार अपनी नाकामी की वजह से ऐसे युवाओं को आयु में छूट देगी जिनके पांच साल सरकार की नाकामी की वजह से खराब हो गये हैं ? राज्य बनने के शुरुआती 15 सालों में 13 बार पीसीएस की परीक्षाएं आयोजित की गई जबकि पिछले चार सालों में एक भी विज्ञापन पीसीएस से सम्बंधित नही निकाला गया।

राज्य में चार साल में दो-दो मुख्यमंत्री बदल जाते हैं लेकिन किसी को पीसीएस परीक्षाओं पर भर्ती सम्बन्धी ध्यान नही आता। क्या भाजपा को लगता है कि उनके कम शिक्षित मंत्रीयों की तरह जैसे तैसे काम चलाया जा सकता है। फिर देश को उच्च शिक्षण संस्थानों की जरूरत ही क्या है ? न कोई शिक्षित होगा और न ही कोई पीसीएस जैसे पदों की तैयारी करेगा। राज्य बनने के बाद पहली पीसीएस परीक्षा 2002 में हुई थी। जिसका परिणाम 2005 में आया। जिसमें से 20 एसडीएम में 15 उत्तराखंड के थे। 2004 की पीसीएस परीक्षा का परिणाम 2007 में आया। जिसमें 14 एसडीएम में से 09 उत्तराखंड के थे। पीसीएस परीक्षा 2006 का परिणाम 2010 में आया तो 05 एसडीएम में 02 उत्तराखंड के थे। 2010 में हुई परीक्षा का परिणाम 2014 में आया, जिसमें 19 एसडीएम में 16 उत्तराखंड के थे। लेकिन अब स्थिति यह है की 2012 में हुई पीसीएस प्री के परिणामों के बाद भी राज्य सरकार मेन परीक्षा करवाने में असफल है।

मझेदार बात यह है कि माननीय कोर्ट भी इस पर कोई संज्ञान नही ले रहा है कि सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ क्यों कर रही है। याचिका के बाद भी कोर्ट का संज्ञान न लेना अपने आप में सोचने वाला विषय है। हर राज्य अपनी पीसीएस परीक्षाओं की घोषणा कर चुका है लेकिन उत्तराखंड राज्य सरकार अभी भी सोई हुई है या चुनावी तैयारियों में व्यस्त है शायद। क्योंकि भाजपा सरकार की एक मात्र प्राथमिकता है चुनाव, यह बात केंद्र और राज्य दोनों जगह लागू होती है। प्रधानमंत्री मानते तो है कि भारत युवाओं का देश है लेकिन उनके विचार में पकोड़े तलना जैसा ही रोजगार ही सर्वाधिक सही है इसलिए पढ़े लिखे युवाओं के रोजगार के लिए कोई योजना भाजपा के पास नही है।