उत्तराखंड में कोरोना से हालात बिड़ते जा रहे हैं। क्या शहर और क्या पहाड़, सब जगह हालात नाजुक स्थिति में पहुंच चुके हैं। राज्य कंटेनमेंट जोन में दबदिल किया जा रहा है लेकिन बुद्धिजीवियों को लॉकडाउन लगाने में शर्म आ रही है। देहरादून में कंटेनमेंट जोन की संख्या 100 पार कर गई है। इसमें से 50 फीसद से अधिक कंटेनमेंट जोन दून शहर में बनाए गए हैं। पहाड़ों पर भी गांव के गांव कंटेनमेंट जोन में तबदील हो रहे हैं लेकिन अब जाकर याद आई कि पहाड़ पर जाने के लिए सात दिन का क्वारिनटीन जरूरी होगा।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष श्रीवास्तव के आदेश के मुताबिक, रविवार को देहरादून जिले में 11 नए कंटेनमेंट जोन बनाए गए। वहीं, दूसरी तरफ नौ कंटेनमेंट जोन भी समाप्त किए गए। अब जिले में 102 कंटेनमेंट जोन शेष हैं। जिलाधिकारी के मुताबिक, कंटेनमेंट जोन बनाने पर भी अधिक ध्यान दिया जा रहा है। ताकि जहां संक्रमण अधिक है, उसे वहीं तक सीमित कर दिया जाए। ऐसे क्षेत्रों में कम्युनिटी सर्विलांस भी तेज किया जा रहा है।


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उत्तराखंड में अब ब्लैक फंगस के मामले भी बढ़ रहे हैं। ऐसे में हस्पतालों पर भार ओर बढ़ रहा है। दूसरी तरफ राज्य में डेंगू की एंट्री की आशंका भी बढ़ रही है, ऐसे में हस्पतालों पर भार ओर अधिक बढ़ जाएगा। सरकार समय पर सही फैसला नही ले रही है लेकिन जब स्थिति लाचार स्थिति में पहुंच जाएगी फिर सरकार लॉकडाउन की घोषणा करेगी, ये होना लगभग तय है। इसकी बहुत सारी वजह हैं लेकिन एक प्रमुख वजह यह है कि उत्तराखंड का कोरोना ग्राफ निरन्तर बढ़ ही रहा। लगातार दो दिन की गिरावट पिछले एक माह में कभी नही देखी गई है। कंटेनमेंट जोन समस्या का समाधान नही है क्योंकि लोग ऐसे मानने वाले नही है।