इंटरनेट पर पूरी दुनियां में पोर्न परोसा जा रहा है। प्रायः हमने भी अपनी खबरों में पाया है कि पाठकों की दिलचस्पी ऐसी खबरों को पढ़ने में ज्यादा रहती है जो पोर्न के साथ जुड़ी हुई हों। सूचनात्मक खबरें युवा बहुत कम खोलते हैं। इसका मतलब साफ है कि आज का युवा इंटरनेट का इस्तेमाल इन्हीं चीजों पर केंद्रित हो कर कर रहा है। इसमें गलती केवल मोबाइल स्तेमाल करने वाले की नही है बल्कि जिन तरीकों से पोर्न कंटेंट हर जगह परोसा जा रहा है उससे है। आप फोन पर इंटरनेट के माध्यम से कुछ भी खोले आपको कहीं न कहीं ऐसी विज्ञापन या फोटो दिखाई जाती है जिस पर युवा आसानी से खींचा चला जाता है। युवा अवस्था में हार्मोन्स तेजी से विकसित हो रहे होते हैं अर्थात वह शरीर की जरूरत महसूस होने लगती है और युवा आसानी से उसके शिकार हो रहे हैं। विश्व में अगर इसके प्रतिशत की बात करें तो लगभग 70 से 75% लोग इस चीज के शिकार हैं। आम तौर पर यह समझा जाता है कि केवल पुरुष ही ये सब कर रहें है लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। कुछ शोधों में पता चला है कि पोर्न देखने की आदत स्त्रियों में भी तेजी बढ़ रही है। इस विषय में हमने पंजाब के लड़कियों के छात्रा वास पर वाईफाई नेट की मदद से शोध किया तो पाया कि दी गई आइडियों में लगभग 80% लड़कियां पोर्न देखती हैं। पत्रकारिता के मानकों को ध्यान में रखते हुए हम कॉलेज और छात्रावास की जानकारी सार्वजनिक नही कर सकते हैं।

आइए वर्ष 2019 में भारत में प्रकाशित हुए आंकड़ों पर एक नजर डालते हैं - जैसे-जैसे भारत में स्मार्टफोन की पहुंच बढ़ती जा रही है, पोर्न की खपत भी अपने चरम पर पहुंच गई है।  एक नई रिपोर्ट से पता चला है कि भारत में 2019 में 89 प्रतिशत लोगों ने मोबाइल उपकरणों के माध्यम से पोर्न देखा ये 2017 से तीन प्रतिशत अधिक  था । वर्ष 2017 में आंकड़ा  86 प्रतिशत को छू गया था। वयस्क मनोरंजन साइट पोर्नहब के अनुसार, कुल मिलाकर, चार में से तीन लोग विश्व स्तर पर अपने मोबाइल पर पोर्न देख रहे हैं - जिसका अर्थ है कि डेस्कटॉप और लैपटॉप जैसे उपकरण पोर्न देखने के लिए उनके लिए द्वितीयक विकल्प बन गए हैं। साइट ने 2019 में वैश्विक स्तर पर मोबाइल ट्रैफ़िक का अपना हिस्सा 77 प्रतिशत तक पहुँचाया - पूर्व वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई।  

अमेरिका 81 प्रतिशत के साथ दूसरे और ब्राजील 79 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर था। जापान में 70 फीसदी लोगों ने अपने स्मार्टफोन से पोर्नहब में लॉग इन किया जबकि ब्रिटेन में 74 फीसदी लोगों ने मोबाइल पर पोर्न देखा। 2013 में, मोबाइल ट्रैफ़िक ने पोर्नहब ट्रैफ़िक का सिर्फ 40 प्रतिशत हिस्सा लिया, इसकी वार्षिक 'ईयर इन रिव्यू' रिपोर्ट से पता चला।  मोबाइल पर पोर्न देखने का चलन प्रमुख पोर्नहब बाजारों में देखा गया। भारत में स्मार्टफोन पर पोर्न की बढ़ती खपत सस्ते डेटा प्लान के साथ-साथ हाई-एंड स्मार्टफोन में महत्वपूर्ण कीमतों में गिरावट के कारण है, जिसने भारत में 450 मिलियन से अधिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए इंटरनेट सर्फिंग को आसान बना दिया है। स्वीडिश टेलीकॉम उपकरण निर्माता एरिक्सन के अनुसार, भारत में प्रति स्मार्टफोन औसतन 9.8GB प्रति माह डेटा उपयोग दुनिया में सबसे अधिक है जो 2024 तक दोगुना होकर 18GB हो जाएगा।

स्थिति काफी गम्भीर है। एक रिसर्च में यह भी पता चला है कि मोबाइल फोन से युवाओं के बौद्धिक स्तर को नुकासन पहुंच रहा है। इससे युवाओं की याद रखपाने की दिमागी ताकत पर असर पड़ रहा है। युवा बड़ी संख्या में आनिंद्रा और मानसिक तनाव जैसी गम्भीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। भारत में होने वाले यौन उत्पीड़न में भी इसकी अहम भूमिका बताई जा रही है क्योंकि कम आयु में ही हार्मोन्स का प्रबल होना युवाओं को तेजी से इस दिशा में धकेल रहा है।  

देश में चल रहे डिजिटल परिवर्तन से 2021 तक भारत का कुल इंटरनेट उपयोगकर्ता आधार बढ़कर 829 मिलियन होने की उम्मीद है। वयस्क मनोरंजन साइट ने यह भी डेटा जारी किया है कि लोग विभिन्न एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम से इसके पोर्टल तक कैसे पहुंचते हैं। 2019 में, इसकी वेबसाइट पर इसके एंड्रॉइड ट्रैफ़िक का 48 प्रतिशत पाई (पिछले साल का Google का प्रमुख अपडेट), 23 प्रतिशत ओरेओ (2017 का अपडेट), और 12 प्रतिशत नौगट (2016 का अपडेट) से आया था। एक और ध्यान देने योग्य आँकड़ा यह है कि आईओएस में वृद्धि के साथ-साथ एंड्रॉइड का उपयोग कम हो गया है, जिससे आईओएस पोर्नहब ब्राउज़ करने के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम बन गया है।  नवीनतम iOS 13 संस्करण का 71 प्रतिशत बार उपयोग किया जाता है। कुल मिलाकर, एडल्ट स्ट्रीमिंग सेवा ने खुलासा किया कि 2019 में सभी मोबाइल ट्रैफ़िक में iOS का 52.8 प्रतिशत हिस्सा था, जबकि Android ने इस वर्ष 46.6 प्रतिशत ट्रैफ़िक का योगदान दिया।

हैरानी की बात यह है कि मोबाइल एनालिटिक्स साइट ऐप एनी के अनुसार, 100 सबसे ज्यादा डाउनलोड किए जाने वाले मुफ्त या नि:शुल्क ऐप में से एक भी पोर्नोग्राफी के लिए नहीं है क्योंकि लोग अभी भी पोर्नोग्राफी देखने के लिए ब्राउज़र का उपयोग कर रहे हैं। अब आप स्थिति का आंकलन कर ही रहे होंगे कि क्यों विकसित देशों में 12 वर्ष तक बच्चों के फोन उपयोग करने पर प्रतिबंध है।  लेकिन भारत में स्थिति विपरीत है यहां 10 वर्ष के बच्चे भी फोन का उपयोग कर रहे हैं। इसका उनकी मानसिक स्थिति पर क्या असर होगा ये तो आने वाली पीढियां ही बता सकेंगी।