वर्ष 2022 विधानसभा से पहले उत्तराखंड में पांच-पांच साल की फेरबदल के साथ सरकारें बदलती रही हैं। लेकिन इस बार सरकार किसकी बनेगी, इतना आसान नजर नहीं आ रहा जितना की पूर्व में हुआ करता था। इसकी तीन बड़ी वजह हैं। पहली और बड़ी वजह कि कांग्रेस के कुछ बड़े नाम 2017 में भाजपा के पाले में चले गये। इनमें कुछ ऐसे मंत्री है जिनकी अपने क्षेत्र में अच्छी पकड़ भी है। इसलिए क्षेत्रीय जनता के लिए पार्टी से बड़ा वही चेहरा रहेगा। इस वजह से लगता है कि भाजपा भी वापसी की दावेदार है। लेकिन दूसरी वजह में हैं मुद्दे, जो कांग्रेस को फिर से सत्ता में वापसी करवा सकते हैं।


मुद्दा नम्बर एक, रोजगार का मुद्दा। वर्तमान कि भाजपा सरकार युवाओं को रोजगार देने में पूर्ण रूप से विफल रही है। वर्तमान में राज्य का युवा दो भागों में बंटा हुआ है। एक जिसको कोचिंग के बाद भी परीक्षा का अवसर नही मिल रहा और दूसरा जिसने शिक्षा तो ली लेकिन सरकारी नौकरी की जगह निजी कार्य/नौकरी कर ली या बेरोजगार बैठा हुआ है। इस बार मतदान की यहीं बहुत बड़ी भूमिका है। क्योंकि जो कोचिंग के बाद भी पर्याप्त अवसर नही मिलने से नाराज है, उसको तो भाजपा के विरुद्ध वोट करना है। लेकिन वो युवा जिसको केवल चुनावी वादे चाहिए और विकास होता दिख रहा है, भाजपा के हित में वोट करेंगे।

मुद्दा नम्बर दो, महंगाई का मुद्दा। गौरतलब है कि अधिकांश युवाओं के पास रोजगार नही है। घर में एक कमाने वाला और चार खाने वाले हैं। ऐसे में गैस, पेट्रोल-डीजल, दलों, आटे-चावल और तेल का भाव कहीं न कहीं लोगों को परेशान कर रहा है। अगर लोग इसके खिलाफ वोट करते हैं तो कांग्रेस को बड़ा फायदा होगा और बीजेपी जमीन पर आ जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं है कि सभी लोग भाजपा की महंगाई नीति से परेशान हैं। अभी भी जिन लोगों को लगता है कि जनता से वसूले पैसे से देश तरक्की कर रहा है, भाजपा को ही वोट करेंगे। इसलिए महंगाई का मुद्दा 50-50 मानकर चलिए।

अब बात करते हैं तीसरी बड़ी वजह की। राज्य में 2022 विधानसभा चुनाव में दिल्ली की राज्य पार्टी यानी आम आदमी पार्टी भी उत्तराखंड में कूद गई है। पहाड़ समीक्षा के अनुसार गढ़वाल मण्डल में तो आम आदमी कुछ खास नही कर पाएगी लेकिन कुमाऊँ सीटों पर पार्टी का दबदबा रहेगा। इसलिए कुमाऊँ से पार्टी भाजपा के अच्छे वोट काटेगी। कांग्रेस का वोटर कुमाऊँ में आम आदमी पार्टी के आने से ज्यादा प्रभावित नही है। लेकिन गढ़वाल में आम आदमी पार्टी कांग्रेस के ही वोट ज्यादा काटेगी हालांकि बढ़त नही कर पाएगी लेकिन कांग्रेस को नुकसान होगा। इसके आलवा राज में उत्तराखंड क्रांति दल भी सक्रिय भूमिका में है। पिछली बीते पंच वर्षीय विधानसभाओ में इस बार उक्रान्त कुछ अच्छा करेगी। गढ़वाल मण्डल में उक्रान्त भाजपा व कांग्रेस दोनों के कुछ प्रतिशत ही वोटर काटेगी बाकि कुछ प्रतिशत उक्रान्त के अपने पूर्व समर्थक ही हैं। लेकिन कुमाऊँ के एक दो सीटों पर उक्रान्त इस बार जबरदस्त बढ़त ले सकती है। 

कुल मिलाकर इन सब के बीच मतदाता असमंजस में है। विश्लेषण के बाद भाजपा को झटका लगता नजर आ रहा है। लेकिन कांग्रेस की तस्वीर भी साफ नही है। 2017 में 68% ही मतदान हुआ था लेकिन इस बार बहुत से कारणों से मतदान बढ़ने की उम्मीद है। अगर चुनाव प्रतिशत बढ़ता है तो इसका फायदा निश्चित तौर पर कांग्रेस को होगा। पहली बार डेब्यू करती आम आदमी और राज्य पार्टी उक्रान्त इस भूमिका खड़ी नजर नही आती कि पूर्ण बहुमत का आंकड़ा छूँ ले।