जब देश में हाहाकार मचा हुआ था और राज्यों को कोरोना वैक्सीन की जरूरत थी तभी बीच में सीरम इंस्टीट्यूट के सीइओ अदार पूनावाला का अचानक लन्दन चला जाना अपने आप में सन्देहात्मक था। सीरम इंस्टीट्यूट के सीइओ अदार पूनावाला ने अपने एक बयान में भी कहा था कि उनके ऊपर राजनीतिक दबाव डाला जा रहा है लेकिन उन्होंने किसी का नाम नही लिया था। अब इस राज से पर्दा उठ गया है। सीरम इंस्टीट्यूट के सीइओ अदार पूनावाला स्वेच्छा से नही बल्कि किसी के धमकाने के बाद लंदन चले गये थे। वर्तमान केंद्र सरकार को दोहरा चरित्र अक्सर उस वक्त सामने आ ही जाता है जब वह कुछ ऐसा करते है कि अपनी नीतियों को बदलकर हीरो दिखना चाहते हैं। 

जब कोरोना देश में सैकड़ो जाने हर रोज ले रहा था उस वक्त प्रधानमंत्री ने वैक्सीनेशन का काम राज्य सरकारों के ऊपर डाल दिया। देश मैं वैक्सीन के तीन-तीन दाम तय किए गये। लेकिन अब जैसे ही देखा कि स्थिति सामान्य होने लगी है तो फट से कह दिया कि वैक्सीनेशन का काम केंद्र सरकार करेगी। यह पहली बार नही है जब प्रधानमंत्री ने अपने किसी बयान से पलटी मारी है, ऐसा वह अक्सर करते रहते हैं। वजह ? खुद को सुपीरियर दिखाना है। पीएम केयर फंड से खरीदे गये विण्टेलेटर कुछ ही दिनों में खराब हो गये लेकिम मजाल है जो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एक भी कवरेज दिखा दे। 

वैक्सीन निर्माताओं को केंद्र ने धमकाया हुआ था शायद यही वजह थी राज्यों को वैक्सीन भी उपलब्ध नही हो पा रही थी। सीरम इंस्टीट्यूट के सीइओ अदार पूनावाला को जब भारत में रहना सुरक्षित नही लगा तो वे लंदन चले गये। यह गम्भीर आरोप महाराष्ट्र सरकार के एक मंत्रीने लगाया है। उन्होंने कहा कि सीरम इंस्टीट्यूट के सीइओ अदार पूनावाला शरद पवार जी के अच्छे मित्र हैं। सीरम इंस्टीट्यूट के प्रमुख ने महाराष्ट्र को 1.5 करोड़ वैक्सीन डोज उपलब्ध कराने का वादा किया था। हालांकि केंद्र से धमकी मिलने के बाद यह प्रस्ताव अमल में नहीं लाया जा सका। 

महाराष्ट्र सरकार में ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री ने कहा कि सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया के प्रमुख पूनावाला को इंग्लैंड भागने के लिए मजबूर किया गया। केंद्र से उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही थी। अप्रैल के आखिरी हफ्ते में अदार पूनावाला अपनी पत्नी और बच्चों के साथ ब्रिटेन पहुंच गए थे। वहां उन्होंने कहा था कि वैक्सीन आपूर्ति को लेकर धमकियां मिल रही हैं। धमकी भरे फोन से वह काफी व्यथित हैं। उन्होंने कहा कि वैक्सीन को लेकर पैसेवालों और ताकतवर लोगों के धमकी भरे फोन आ रहे हैं। यह बात उन्होंने 'दि टाइम्स' को दिए एक साक्षात्कार में कही। अब सवाल ये है कि इस समय भाजपा के लोगों से बड़े पैसे वाले देश में कौन है ? सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या मोदी मुखोटा पहनकर देशवासियों को बेवकूफ बना रहें हैं ? इस खबर के सामने आने के बाद मोदी की डूबती हुई लोकप्रियता पर एक और ग्रहण लग गया है।

क्योंकि जिस व्यक्ति ने पहले राज्यों को उनके हाल पर छोड़ दिया था और राज्यों को आर्डर के बाद भी वैक्सीन का न मिलना, जैसे कई सवालों के बाद जब स्थिति सामान्य होने लगी तो प्रधनमंत्री का ये कहना कि वैक्सीनेशन केंद्र करेगा सन्देहात्मक है। आखिर जब जरूरत थी ऐसे बयान कि उस वक्त प्रधानमंत्री ने हाथ खड़े क्यों किये और अब जब स्थिति सामान्य की तरफ लौट रही है तो अचानक पूरे देश की टीकाकरण की याद आ गई।