वीर शहीद मनदीप सिंह नेगी की माँ शव से लिपटकर याद करती रही बेटे द्वारा कही गई बातें। पुत्र की शादी के सपनों को सजाए कर रही थी इंतजार, बेटा शहीद हो कफन में लौटा घर।

पौड़ी जिले का लाल शहीद मनदीप सिंह नेगी घर का अकेला चिराग था। माता-पिता का बुढापे का सहारा ऐसे वक्त में देश के लिए कुर्बान हो गया जब उसकी देश के साथ साथ माता पिता को भी जरूरत थी। जब शहीद मनदीप सिंह का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा तो जन सैलाब उमड़ पड़ा। हर किसी की आंखे नम थी क्योंकि जिनके आगे वे छोटे से बड़े हुए, जिनके साथ पले बढ़े, आज एक झटके में सब तबाह हो गया। कम आयु में मनदीप देश के लिए शहीद हो गये लेकिन जिम्मेदारी कितनी बड़ी थी ये माँ द्वारा कहे गये इन शब्दों से साफ व्यक्त होता है।


मनदीप एक आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में पले बढ़े लेकिन अपनी चाह और कठिन परिश्रम से उन्होंने सेना में अपनी जगह बनाई। बेटे की इस कामयाबी के बाद आर्थिक तंगी का लंबा संघर्ष करने वाले माता-पिता की आंखों में भी कुछ सपने पलने लगे थे। लेकिन व्यक्त इतना क्रूर होगा किसी ने सोचा नही था। शहीद मनदीप की माँ ने कहा कि जब भी मेरी बेटे से फोन पर बात होती थी तो वह मुझे बड़ा घर बनाने की बात अवश्य करता था। आज मुझे यकीन ही नही होता कि मेरा बेटा मुझे छोड़कर चला गया है।

माँ अपने बेटे मनदीप के शव से लिपटकर बिलख-बिलखकर यही कहती रही कि तूने बचपन से ही बहुत कठनाई सही, हमारी आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। लेकिन जब तू सेना में भर्ती हुआ और पहली बार छुट्टी पर घर आया तो तूने अपने पिता को मजदूरी करने से साफ इनकार कर दिया। कहाँ चला गया मेरा बेटा मुझे छोड़कर। माँ के इन शब्दों को सुनकर पूरा गांव भावुक हो उठा, सबकी आंखे नम हो गई। और हों भी क्यों नही, पत्थरों जैसे जीवन से निकलकर अगर कोई कली खिली थी तो इसके पीछे उसकी बेसुमार मेहनत और त्याग स्पष्ट दिखता है। पहाड़ समीक्षा वीर शहीद मनदीप सिंह नेगी को शत शत नमन करता है।