समय रहते नहीं बढाई गई सुरक्षा तो हो सकती है दिक्कतें। संसाधन जुटाने से अच्छा कदम है सुरक्षा को अपनाए सरकार। अमरनाथ यात्रा रद्द हो सकती है तो बद्रीनाथ, केदारनाथ क्यों नही? देवस्थानम बोर्ड के बहकावे प्रदेश वासियों की जान से न खेले सरकार ।

प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर से उभरे जख्म अभी भरे भी नही हैं कि राज्य में दूसरे राज्यों के पर्यटक बिना कोरोना जांच के राज्य में पहुंच रहे हैं। पहले कुम्भ के चलते राज्य में कोरोना को बढ़ावा मिला और अब पर्यटन के नाम पर फिर से दूसरे राज्य के लोग पहाड़ों तक बिना रोक टोक के जाएंगे तो तीसरी लहर पर कैसे काबू पाया जाएगा। जैसा कि पूर्व से ही ज्ञात है कि अभी कोरोना की एक लहर और बाकी है जिसका प्रभाव अन्य कई राज्य में शुरू भी हो चुका है। ऐसे में यह बहुत जरूरी हो जाता है कि उत्तराखंड अपने बॉर्डर पर जांच तेज करने के बाद ही पर्यटकों को राज्य में आने की अनुमति दे और राज्य में आने के बाद भी प्रत्येक यात्री की कोरोना जांच हो तभी उसको पहाड़ी क्षेत्र में जाने की अनुमति दी जाय।


आपको बता दें कि कई राज्यों में डेल्टा प्लस कोरोना वायरस के संक्रमित मिल चुके हैं। ऐसे में प्रदेश सरकार को राजस्व की बजाय जनता की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। आखिर केवल उत्तराखंड ही क्यों पर्यटन के लिए खोला जाय, जबकि हाल ही में अमरनाथ यात्रा पर रोक लगा दी गई है। अंतरराज्यीय व्यस्वथाओं को सही रखकर भी शराब से अच्छा खासा राजस्व प्राप्त हो ही जाता है फिर ऐसे समय में पर्यटन पर रोक लगाना ही उचित कदम होगा।

यदि फिर भी सरकार को पर्यटन को बढ़ावा देना ही है तो जांच के मानकों में सुधार हो और यात्री की राज्य के बाहर व अंदर की जांचों के परिणाम के बाद ही पहाड़ी क्षेत्रों में जाने की अनुमति मिले। गौरतलब है कि कुम्भ के दौरान हुई फर्जी जांच का खमियाजा उत्तराखंड ने हाजरों जान देकर चुकाया है। इस बात से भले ही सरकार और प्रशासन इनकार करे लेकिन फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद साफ हो गया है कि दूसरे राज्यों से आये लोगों की जांच सही से नही होने की वजह से ही कोरोना राज्य पर भारी पड़ा। एक बार फिर जब सम्भलने की जरूरत है तो सरकार राजस्व के चक्कर में जांच की अनदेखी कर रही है।