उत्तराखंड राज्य के धारचूला क्षेत्र से एक डराने वाली खबर सामने आई है। धारचूला क्षेत्र में बीते तीन साल में 30 से ज्यादा बार भूकम्प के झटके महसूस किए गये है। देहरादून, वाडिया  संस्थान द्वारा प्रकाशित "जियोफिजिकल जर्नल इंटरनेशनल" व "टेक्टोनोफिजिक्स जर्नल" में यह खुलासा किया गया है। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान देहरादून के वैज्ञानिक डॉ. देवजीत हजारिका के नेतृत्व में एक टीम ने धारचूला और कुमाऊं हिमालय के आसपास के क्षेत्र में भूकंप के कारण जानने को काली नदी के किनारे 15 भूकंपीय स्टेशन स्थापित किए और तीन वर्ष तक अध्ययन किया।  अध्ययन के बाद प्राप्त आंकड़ों के प्रकाशन किया गया जिसके आंकड़े हैरान व परेशान करने वाले हैं। 

इन प्रकाशन में सामने आया है कि धारचुला क्षेत्र में पिछले तीन सालों में वैज्ञानिकों ने 4.4 तीव्रता के 30 से अधिक भूकंप रिकार्ड किए हैं। इससे कम के कई सारे भूंकप तो ऐसे थे जो रिकार्ड श्रेणी में ही नहीं आते हैं। धारचुला में 1 दिसम्बर 2016 को 5.2 तीव्रता का भूकंप आया था। इसके अलावा 6 फरवरी 2017 को 5.5 का एक भूंकप भी यहां दर्ज किया गया था इसका केन्द्र रुद्रप्रयाग था। दरअसल, भूकम्प की तीन श्रेणियां होती हैं जिसमें उथला(shallow), मध्यवर्ती(intermediate), गहरा(deep) भूकम्प शामिल हैं। उथला(shallow) भूकम्प धरती में 71 किलोमीटर भीतर से उठता है, मध्यवर्ती(intermediate) 71 से 300 किलोमीटर से जबकि गहरा (deep) 300 किलोमीटर से अधिक नीचे से उत्पन्न होने होता है। भूकम्प के केंद्र को focus कहा जाता है। जबकि धरती की ऊपरी सतह पर ठीक focus के ऊपर इसको epicentre कहा जाता है। इन दोनों के बीच सीधे अंतर को focal depth कहा जाता है। शोध में कहा गया है कि उत्तर पश्चिमी हिमालय के मुकाबले कुमाऊं हिमालय में क्रस्ट लगभग 38-42 किमी मोटा है।  यह क्रस्ट इस क्षेत्र में सूक्ष्म और मध्यम तीव्रता के भूकंपों के लिए जिम्मेदार है।

इस प्रकाशन में वाडिया संस्थान के वैज्ञानिकों ने कहा है कि कांगड़ा (1905) और बिहार-नेपाल (1934) भूकंपों के बाद क्षेत्र में 8.0 से अधिक तीव्रता के भूकंप नहीं आए हैं। जो हिमालय में भविष्य में बड़े भूकंप की चेतावनी है।  धारचूला और आसपास के क्षेत्र में एक रैंप तनावग्रस्त है, जो कमजोर भारतीय प्लेट पर दबाव डालता है। यह रैंप धारचूला क्षेत्र के नीचे है। काली नदी के किनारे 15 भूकंपीय स्टेशन स्थापित किए हैं जो लगातार भूगर्भीक गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। वैज्ञानिकों ने क्षेत्र में बड़ा भूकंप आने की आशंका जाहिर की है। प्रकाशन में कहा गया है कि यदि इस क्षेत्र में भूकंप आया तो कम से कम एक लाख की आबादी प्रभावित होगी। साथ ही पड़ोसी देश नेपाल पर भी इसका असर पड़ेगा।