जनता की सुरक्षा से ज्यादा 2022 विधानसभा के लिए चिंतित है प्रदेश की सरकार, लोगों को नहीं मिल पा रहे समय पर टीके तो सरकारें व स्वास्थ्य विभाग मनमानी से बढ़ा रही है समय।

उत्तराखंड में टीकाकरण जिस तेजी के साथ शुरू किया गया था, आज उसमें एक चौथाई भी तेजी नही बची है। 45+ आयु के ऐसे लोग जिनको उनके गाँव में एक टीका मिला, दो माह से ज्यादा वक्त गुजरने पर भी दूसरा टीका उपलब्ध नही हो पाया है। सरकार के खेल भी निराला है। पहले दूसरे टीके को 28 दिन के भीतर लगना था फिर कुछ और समय बढ़ाया गया और अब तो तीन-तीन माह तक भी लोगों को दूसरा टीका नही मिल रहा है। कृतिनगर ब्लॉक के अंदर ही दर्जनों ऐसे गाँव है जिनको वैक्सीन की दूसरी डोज का इंतजार है लेकिन सरकार के पास दवा ही नही है।

सरकार ने अब तक 18 से 44 वर्ष के आयु वर्ग का टीकाकरण भी 45+ के लिए प्राप्त कोटे से किया है। ऐसे में बड़ा सवाल कि डबल इंजन की सरकार होने के बाबजूद भी जब ये हाल है तो उन प्रदेशों का क्या हाल होगा जहां एकल इंजल की सरकारें है। कुछ दिन फ्री वैक्सिनेशन का ढोल बजाने वाले लोग चुप क्यों हैं ? जनता पूछ रही है। एक दो जिलों में वैक्सीन की कमी हो तो चलता है लेकिन यहां तो हर जिले में वैक्सीन का अभाव है,जबकि अभी बड़ी संख्या में नागरिकों ने रजिस्ट्रेशन ही नही करवाया है।

बीते दो माह में जौनसार के कुल 297 व्यक्तियों और पछवादून के कुल 630 नागरिकों को कोरोना की पहली डोज मिली है। और अब पिछले कुछ दिनों से चल रही वैक्सीन की कमी से टीकाकरण अभियान की गति थम गई।रविवार से कालसी प्रखंड से जुड़े पीएचसी कालसी, सीएचसी साहिया, पीएचसी पजिटिलानी, पीएचसी कोटी-कालोनी, एसएडी लखवाड़, एसएडी थैना व रेड क्रास सोसाइटी अस्पताल नागथात समेत सात केंद्रों में वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने से टीकाकरण ठप पड़ गया।

आंकड़े बता रहे हैं कि टीकाकरण किस स्तर पर हो रहा है। यही हाल रहा तो 2021 के अंत तक भी शतप्रतिशत टीकाकरण हो पाना मुश्किल है। जनता के प्रति सरकारों की कोई जवाबदेही नजर नही आती है। बस केवल सरकारी तंत्र को हवा बनाने में उपयोग कर रहे हैं राजनीति से जुड़े लोग। आखिर जब प्रधानमंत्री ने कह दिया था कि वैक्सीन केंद्र ही देगा तो अभी तक उत्तराखंड में वैक्सीन क्यों नही पहुँच पा रही हैं ? जबकि राज्य की जनता ने 2017 में डबल इंजन की पुकार पर भाजपा को मतदान करके सत्ता में भी लाया। फिर भी कार्य आधे इंजन जैसा क्यों ?