देवस्थानम बोर्ड पर उत्तराखंड में सियासी पारा दिन बा दिन ऊपर चढ़ता जा रहा है। देवस्थानम बोर्ड के विरोध में तीर्थ पुरोहित ही दो साल से सरकार को आगाह कर रहे हैं, लेकिन सरकार को इस बात से कोई फर्क नही पड़ रहा। आपको बता दें कि देवस्थानम बोर्ड के विरोध में भाजपा के सबसे यशस्वी नेता सुब्रमण्यम पहले ही हाईकोर्ट में याचिका डाल चुके हैं। लेकिन सरकार पक्ष के वकील की दलीलों को कोर्ट ने सुरक्षित कर अभी तक कोई स्पष्ट फैसला इस पर नही दिया। लेकिन देवस्थानम बोर्ड धीरे धीरे अपनी नकेल कसने लगा है जिसका राज्य में जोरदार विरोध हो रहा है।

पहले इसमें विरोध के सुर सुब्रमण्यम और पुरोहितों की तरफ से ही थे लेकिन अब चुनाव नजदीक देख कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दल भी इस मामले में कूद गये हैं। गौरतलब है कि वोट तो भाजपा को भी खराब नही लगते इसलिए उम्मीद है कि 2022 के चुनाव तक इस मामले को दबाने का प्रयास सत्ताधारी पार्टी भी विरोध के बाद अवश्य करेगी। देवस्थानम बोर्ड अब राजनीतिक रंग में रंग चुका है लेकिन इस बीच उक्रान्त के सीनियर नेता दिवाकर भट्ट का एक ऐसा बयान आया है जिसने देवस्थानम बोर्ड की नियति पर ही सवाल खड़ा कर दिया है।

दिवाकर भट्ट ने कहा कि देवस्थानम बोर्ड पूरी तरह से गलत विचारधारा के तहत बनाया गया है। उन्होंने प्रेस वार्ता में कहा कि क्या ब्रदीनाथ, केदारनाथ जैसे स्थलों को हम पर्यटन स्थल बना रहे हैं ? फिर श्रद्धा का भाव कहां रह जाएगा। आदिगुरु शंकराचार्य मिलों पैदल चलकर यहां आए और धाम की स्थापना की, लेकिन आज लोग हैलीकॉप्टर से सीधे मंदिर के प्रांगण में उतरना चाहते हैं। दिवाकर भट्ट ने कहा कि दुर्भाग्य से हम ऐसी परिस्थितियों में उलझ गये हैं कि उत्तर प्रदेश से पृथक होने के मायने ही बदल गये हैं। 

उक्रान्त नेता दिवाकर भट्ट ने आरोप लगाया कि सरकार को सिर्फ टिहरी उत्तरकाशी रुद्रप्रयाग व चमोली जिलों के मंदिरों से ही क्यों दिक्कत है। आपको अगर देवस्थानम बोर्ड स्थापित करना था तो राज्य के अभी मंदिरों पर लागू करते। पौड़ी, हरिद्वार और कुमाऊँ के कई अन्य मंदिरों की कमाई भी अच्छी है। हर की पौड़ी को देवस्थानम बोर्ड में क्यों नही सम्मिलित किया गया ? दिवाकर भट्ट देर से जागे लेकिन उन्होंने जो सवाल दागे उससे सरकार में खलबली जरूर मचेगी।

आपको बता दें कि इस मामले पर कांग्रेस भी बड़ा ऐलान कर चुकी है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि अगर कांग्रेस सत्ता में वापसी करती है तो देवस्थानम बोर्ड भंग होगा। नेताओं का कहना है कि सभी प्राचीन मंदिर कुल पुरोहित के अनुसार ही चलते हैं और चलते रहेंगे। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जिनको ब्रह्ममुहूर्त का ही पता नही, उनकी मनसा साफ है कि वह कमाई के लिए ये सब कर रहे हैं। लेकिन भगवान सब देख रहा है और इसका परिणाम तुम्हे अवश्य भोगना पड़ेगा। इस मामले से आम आदमी पार्टी अभी दूरी बनाये हुए है। वजह क्या है ? ये तो कोई प्रतिक्रिया आने के बाद ही साफ हो पायेगा।