राज्यके शुरू हुआ फिर से चालान का खेल, दो वर्ष से डबल हैलमेट से अनजान पुलिस को अचानक आई डबल हैलमेट की याद, तो हुए की चालान।

उत्तराखंड में अक्सर देखा गया है कि जैसे ही चुनाव नजदीक आते हैं पुलिस या सरकारी विभाग से जुड़े लोग कई तरीकों से वसूली कार्य शुरू कर देते हैं। सरकारी महकमा अचानक से उन नियमों का हवाला देते नजर आते हैं जिसका पालन बीते एक दो साल से कोई कर ही नही रहा होता है। यहां तक की अधिकांश बार सरकारी सेवा से जुड़े लोग भी। तो क्या ऐसा सिर्फ इसलिए किया जाता है कि चुनाव पर खर्च होने वाला पैसा जनता से वसूला जाय ? और सत्ताधारी पार्टी के इशारों पर सरकारी महकमें वसूली पर उतर आते हैं। जब कांग्रेस की सरकार थी उस वक्त दवा विक्रेताओं को नियमों की दलील के साथ पैसे एकत्रित करने की योजना बनाई गई और अब भाजपा की सरकार है तो 2022 के लिए पुलिस द्वारा दुपहिया वाहन पर डबल हैलमेट को लेकर योजना बनाई गई। हालांकि यह नियम लगभग 2 साल से है कि दुपहिया पर दोनों सवारी को हैलमेट पहनना है, लेकिन सवाल कि जब दो साल से पुलिस इस नियम की अनदेखी कर रही है तो अचानक कैसे जाग गई।


अकेले देहरादून में सोमवार और मंगलवार को 85 वाहनों के चालन विभिन्न कारणों से किए गये। आरटीओ संदीप सैनी ने बताया कि सोमवार और मंगलवार को हेलमेट के अलावा 30 चालान वाहन का बीमा ना होने पर और 24 चालान प्रदूषण प्रमाण पत्र ना होने पर किये गए। इस दौरान दो चालान वाहन चलाते समय मोबाइल का प्रयोग करने पर किये गए, जबकि एक वाहन सीज किया गया। अन्य नियम तोड़ने पर 61 वाहनों के चालान अलग से किये गए।


दिक्कत ये नहीं है कि चालान क्यों किए जा रहे हैं, लेकिन चालान में इस प्रकार की तेजी सालों बाद करने से जनता को दिक्कत है। मानकों की अनदेखी नही होनी चाहिए। लेकिन वर्षों पहले बने ऐसे नियम जिनका पालन खुद सरकारी महकमा नही कर रहा होता है, पर अचानक आकर जनता से पैसे वसूलने लगे तो जनता को परेशानी तो जरूर होगी। सुरक्षा के लिहाज व दुर्घटनाओं पर अंकुश के लिए बनाये गये नियम पर जब महज एक माह ढोल बजेगा तो सवाल खड़े जरूर होंगे।